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बिजली संशोधन बिल: नायब सरकार और कर्मचारी संगठन में टकराव, 10 मार्च को देशव्यापी हड़ताल

Published: Sun, 08 Mar 2026 07:53 PM (IST)

केंद्र सरकार और बिजली कर्मचारी संगठन बिजली संशोधन बिल को लेकर आमने-सामने हैं। यह बिल 10 मार्च को संसद में पेश हो सकता है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी। फाइल फोटो

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी। फाइल फोटो

HighLights

  1. बिजली संशोधन बिल 10 मार्च को संसद में पेश होने की संभावना।

  2. कर्मचारी संगठन 10 मार्च को देशव्यापी काम ठप कर करेंगे विरोध।

  3. बिल निजीकरण को बढ़ावा देगा, जनविरोधी बताया जा रहा है।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। बिजली संशोधन बिल को लेकर केंद्र सरकार और बिजली कर्मचारी संगठन आमने-सामने आ गए हैं। केंद्र सरकार द्वारा बिजली निजीकरण के इस बिल को 10 मार्च को संसद में पेश करने की संभावना है।

बिल को पारित होने से रोकने के लिए बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति (एनसीसीओईईई) ने भी कमर कस ली है। समिति ने 10 मार्च को कामकाज ठप कर देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का एलान कर दिया है।

राष्ट्रीय समन्वय समिति के संयोजक एवं इलेक्ट्रिसिटी एंप्लाइज फेडरेशन आफ इंडिया (ईईएफआइ) के महासचिव सुदीप दत्ता, उपाध्यक्ष सुभाष लांबा व सुरेश राठी ने बताया कि बिजली कर्मचारियों और इंजीनियर ने इस बिल को पारित होने से रोकने के लिए 10 मार्च को नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में सम्मेलन बुलाया है।

इस सम्मेलन सभी राजनीतिक दलों के संसदीय दल के नेताओं (सांसदों) को आमंत्रित किया गया है, जिसमें समन्वय समिति के सदस्य उन्हें बिल के पारित होने के बाद किसानों, उपभोक्ताओं, कर्मचारियों और राष्ट्र पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी देंगे और संसद में बिल पेश होने पर इसका विरोध करने का आग्रह करेंगे। इस सम्मेलन में संयुक्त किसान मोर्चा व केंद्रीय ट्रेड यूनियन के सदस्यों को भी आमंत्रित किया गया है।

समिति के संयोजक सुदीप दत्ता और ईईएफआइ के उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि केंद्र सरकार शीध्र ही इस बिल को संसद में पेश कर पास करवाना चाहती है। संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी बिल का विरोध करने का एलान किया है।

यह बिल कारपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए बिजली वितरण प्रणाली को निजी हाथों में सौंपने का माध्यम है। इसीलिए सरकार निजी कंपनियों के मुनाफे सुनिश्चित करने और उनके सामने आने वाली संभावित सभी परेशानियां दूर करने के लिए ठीक चल रहे मीटरों को बदलकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगा रही है।

बिल पारित होने के बाद वितरण प्रणाली के निजी कंपनियों को भी लाइसेंस दिए जाएंगे और उन्हें किस कंज्यूमर को बिजली आपूर्ति करेंगे, इसका अधिकार होगा।

सुभाष लांबा ने कहा कि विद्युत मंत्रालय ने पहले इस बिल पर सभी हितधारकों से टिप्पणियां और सुझाव मांगे थे। देशभर के बिजली क्षेत्र से जुड़े सभी फेडरेशनों, ट्रेड यूनियनों और संगठनों ने सर्वसम्मति से कहा कि यह बिल जनविरोधी है और इसे वापस लिया जाना चाहिए।

लेकिन इन सभी हितधारकों की टिप्पणियां न तो सार्वजनिक की गई हैं और न ही परामर्श बैठकों की कार्यवाही जारी की गई है। इसके विपरीत 30 जनवरी को विद्युत मंत्रालय ने एक वर्किंग ग्रुप का गठन किया, जिसमें आल इंडिया डिस्काम एसोसिएशन को शामिल किया गया, जो पहले से ही बिजली क्षेत्र के निजीकरण का खुला समर्थन करता रहा है।

उन्होंने कहा कि जिस संगठन ने पहले ही इस बिल का समर्थन किया है, उसे इस कानून को अंतिम रूप देने वाले वर्किंग ग्रुप में शामिल करना पूरी प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण और असंवैधानिक बनाता है।