चंडीगढ़ [दयानंद शर्मा]। पूजा पाठ से मिलने वाला राशन व दान भी आय का हिस्सा है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान साफ किया कि पूजा पाठ के तौर पर मिले पैसे को भी आय माना जाएगा न कि दान।

हाई कोर्ट ने यह आदेश रोहतक के एक पति-पत्नी के वैवाहिक विवाद के मामले में दिया। पति ने कम आय का हवाला देकर गुजारा भत्ता कम कराने के लिए याचिका दाखिल की थी। पुजारी का काम करने वाले दिव्यांग पति ने कहा कि वह पूजा पाठ का काम करता है और उसकी आय केवल पांच हजार रुपये है। रोहतक की जिला अदालत ने उसे आदेश दिया है कि वह अपनी पत्नी को पांच हजार रुपये महीना गुजारा भत्ता दे। उसने दलील दी कि उसकी आय केवल पांच हजार रुपये है और वह घर का गुजारा पूजा पाठ से मिलने वाले दान-दक्षिणा से करता है।

कोर्ट को बताया गया कि याची पूजा पाठ करके लगभग पंद्रह हजार रुपये महीना कमाता है। हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि क्या पूजा पाठ से मिलने वाला दान आय नहीं है। कोर्ट ने कहा कि दान दक्षिणा से मिलने वाली राशि भी तो आय है। इस तरह की दलील देकर याची अपने कर्तव्य से नहीं बच सकता।

हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट के आदेश को जारी रखते हुए आदेश दिया कि पुजारी की आमदनी को 15 हजार रुपये मानते हुए चार हजार रुपये गुजारे भत्ते में पत्नी को दिए जाएं। याची का 25 जनवरी 2018 को तलाक हो चुका है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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