राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने ‘करनाल से यमुनानगर’ के बीच प्रस्तावित नई रेल लाइन परियोजना को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। इस रेल परियोजना के पूरा होने से दोनों शहर लाखों लोगों को लाभ मिलेगा। रेल मार्ग के जरिये उत्तर प्रदेश जाने वाले लोगों को भी इस परियोजना का फायदा मिलने वाला है। इस रेल परियोजना के चालू होने से 50 किलोमीटर का सफर कम हो जाएगा।

करनाल-यमुनानगर रेल लाइन परियोजना मंजूरी के लिए सितंबर 2019 में रेल मंत्रालय को भेज दी गई थी, लेकिन रेल मंत्रालय ने अपने कुछ सुझाव देकर इन्हें परियोजना रिपोर्ट में शामिल करने की बात कही थी। इन सुझाव को रेल परियोजना में शामिल करने के उपरांत हरियाणा सरकार ने 20 जुलाई को परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी दे दी है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की इस महत्वपूर्ण रेल परियोजना को स्वीकृत कराने के लिए केंद्रीय रेल मंत्री के साथ कई बैठकें की। हरियाणा रेल अवसंरचना विकास निगम (एचआरआइडीसी) ने 883.78 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत की इस डीपीआर को अंतिम रूप दिया है। यह परियोजना लगभग चार वर्ष की अवधि में क्रियान्वित होगी।

प्रस्तावित करनाल-यमुनानगर नई रेल लाइन दिल्ली-अंबाला रेलवे लाइन पर मौजूदा करनाल रेलवे स्टेशन से शुरू होगी और अंबाला-सहारनपुर रेलवे लाइन पर मौजूदा जगाधरी-वर्कशाप रेलवे स्टेशन से जुड़ेगी। करनाल, पानीपत और मध्य हरियाणा के अन्य हिस्सों को सीधा संपर्क प्रदान करते हुए यह नई लाइन पूर्वी डीएफसी के लिए एक फीडर मार्ग के रूप में कार्य करेगी, जिसमें कलानौर स्टेशन (यमुनानगर के साथ) पर रेलवे के साथ इंटरचेंज प्वाइंट होगा।

अंबाला छावनी के रास्ते करनाल से यमुनानगर तक मौजूदा रेल मार्ग से दूरी 121 किलोमीटर है। करनाल और यमुनानगर के बीच सडक़ मार्ग से दूरी 67 किलोमीटर है। इस प्रकार 64.6 किलोमीटर लंबी यह प्रस्तावित नई रेलवे लाइन, इन दोनों शहरों के बीच सबसे छोटा लिंक प्रदान करेगी और यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई के लिए यात्रा के समय को बहुत कम कर देगी। यह परियोजना हरियाणा के दक्षिणी एवं पश्चिमी हिस्सों को पवित्र शहर हरिद्वार से सीधे जोड़ेगी। करनाल-यमुनानगर रेल लाइन कलानौर में इस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर के लिए फीडर रूट कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिससे करनाल-यमुनानगर क्षेत्र में लाजिस्टिक पार्कों के विकास का वातावरण भी बनेगा।

 

Edited By: Kamlesh Bhatt