चंडीगढ़, जेएनएन। रोहतक से तीन बार लोकसभा के सदस्य रहे दीपेंद्र हुड्डा की राज्यसभा में एंट्री पक्की हो गई है। प्रदेश के इतिहास मेें यह दूसरा मौका है जब दादा के बाद पोता भी राज्यसभा पहुंचेगा। दीपेंद्र हुड्डा के दादा स्वर्गीय रणबीर सिंह 1972 से 1978 तक राज्यसभा के सदस्य रहे हैं। इसके अलावा, चौटाला परिवार ऐसा है जिससे दादा, बेटा और पोता राज्‍यसभा पहुंचे।

दीपेंद्र हुड्डा के दादा रणबीर सिंह 1972 से 1978 तक रहे राज्यसभा सदस्य

हरियाणा में चौटाला परिवार इकलौता सियासी घराना है जिसमें पिता, पुत्र और पौत्र ने राज्यसभा में हरियाणा का प्रतिनिधित्व किया। स्वर्गीय देवी लाल वर्ष 1998 से 2001 तक और फिर उनके पौत्र डॉ. अजय सिंह चौटाला वर्ष 2004 से 2009 तक राज्य सभा के सदस्य रहे। ताऊ देवी लाल के बेटे पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला और मौजूदा समय में हरियाणा मेें कैबिनट मंत्री रणजीत सिंह चौटाला भी राज्य सभा के सदस्य रहे हैं।

चौटाला परिवार इकलौता सियासी घराना जिसमें पिता, पुत्र और पौत्र पहुंचे राज्यसभा

देवीलाल, ओमप्रकाश चौटला और अजय चौटाला।

राज्यसभा में हैट्रिक की बात करें तो  यह रिकॉर्ड सुल्तान सिंह और चौधरी बीरेंदर सिंह के नाम पर है। दोनों ही तीन बार राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुए। हालांकि कार्यकाल की दृष्टि से सुल्तान सिंह सबसे आगे हैं जो वर्ष 1970 से 1986 तक लगातार 16 साल राज्य सभा के सदस्य रहे। बीरेंद्र सिंह अगस्त 2010 से जनवरी 2020 तक साढ़े नौ साल तक राज्यसभा के सदस्य रहे। कांग्रेस से स्वर्गीय मुख्यमंत्री बंसी लाल, कृष्ण कांत, मुख्त्यार सिंह मलिक, हरि सिंह नलवा, रामजीलाल, राम प्रकाश, शादी लाल बतरा और जनसंघ से सुजान सिंह दो बार राज्य सभा के सदस्य बने हैं।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत सिंह ने बताया कि तीन मुख्यमंत्रियों ने अपनी सरकार रहते बेटों को राज्यसभा पहुंचाया। स्वर्गीय बंसी लाल ने यह परंपरा शुरू की जिन्होंने 1986 में मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद अपने पुत्र सुरेंद्र सिंह को राज्य सभा भेजा। उनके साथ स्वर्गीय भजन लाल भी राज्य सभा पहुंचे। सुरेंद्र सिंह ने पूरे छह साल का कार्यकाल पूरा किया, जबकि भजन लाल ने नवंबर 1989 में फरीदाबाद से लोक सभा चुनाव जीतने के बाद राज्य सभा से त्यागपत्र दे दिया था।

इसी तरह ताऊ देवी लाल जून 1987 में मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने अगस्त में अपने बड़े पुत्र ओम प्रकाश चौटाला को राज्य सभा सदस्य बनवा दिया। दरअसल कांग्रेस के एमपी कौशिक जो अप्रैल 1984 में राज्य सभा सदस्य बने थी, कि मई 1987 में मृत्यु के बाद रिक्त हुई सीट पर पहले तो जनता दल के कृष्ण कुमार दीपक को चुना गया और फिर उनके त्यागपत्र के बाद ओम प्रकाश चौटाला को शेष बची अवधि अर्थात अप्रैल 1990 तक  के लिए राज्य सभा सदस्य बनाया गया। राज्य सभा सदस्य रहते हुए ही चौटाला पहली बार दिसंबर 1989 में हरियाणा के मुख्यमंत्री बने थे, जबकि देवी लाल उप प्रधानमंत्री बनाए गए।

इसी बीच देवी लाल के दूसरे पुत्र रणजीत सिंह चौटाला भी सितंबर 1990 से अगस्त 1992 तक राज्यसभा में रहे। वर्ष 1989 में भजन लाल के त्यागपत्र के बाद यह सीट खाली हुई थी। उस समय मुख्यमंत्री हुकम सिंह थे। इसके बाद जून 2004 में ओम प्रकाश चौटाला ने अपने बड़े पुत्र अजय सिंह चौटाला को राज्य सभा भिजवाया। हालांकि नवंबर 2009 में हरियाणा विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने राज्यसभा से त्यागपत्र दे दिया था। 

दस मुख्यमंत्रियों में से छह पहुंचे राज्यसभा

प्रदेश में दस मुख्यमंत्रियों में से छह सीएम राज्य सभा के सदस्य रहे हैं। स्वर्गीय बंसी लाल वर्ष 1960 से 1966 तक संयुक्त पंजाब से और बाद में वर्ष 1976 से 1980 तक हरियाणा से राज्य सभा सदस्य रहे। उनके बाद पूर्व मुख्यमंत्री भगवत दयाल शर्मा  1968 से 1974, भजन लाल 1986 से 1989, बनारसी दास गुप्ता 1996 से 2002, ओम प्रकाश चौटाला 1987 से 1990 और देवी लाल 1998 से 2001 तक राज्य सभा सदस्य रहे।

18 मार्च को निर्वाचित घोषित हो जाएंगे तीनों नए सांसद

राज्यसभा के लिए नामांकन की समय सीमा खत्म होने के बाद अब सोमवार को नामांकन पत्रों की जांच होगी तथा 18 मार्च तक नामांकन वापस लिए जा सकते हैं। चूंकि तीन सीटों के लिए तीन उम्मीदवार ही मैदान में हैं, इसलिए मतदान की जरूरत नहीं। ऐसे में निर्वाचन अधिकारी अजित बालाजी जोशी 18 मार्च को ही भाजपा के राम चंद्र जांगड़ा और दुष्यंत कुमार गौतम तथा कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा को निर्वाचित घोषित कर देंगे।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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