जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा में फरवरी 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु का रोहतक वाला घर फूंकने की साजिश हिंसा से दो दिन पहले ही रच ली गई थी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) द्वारा दायर चार्जशीट में इस साजिश को अंजाम देने के लिए जिन लोगों को आरोपित ठहराया गया, वे सभी कांग्रेस से ताल्लुक रखते हैं। इससे आने वाले समय में कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ने के पूरे आसार हैैं।

कॉल डिटेल के अनुसार दो दिन पहले रच ली गई थी कैप्टन अभिमन्‍यु का घर फूंकने की साजिश

सीबीआइ द्वारा खंगाली गई आरोपितों की कॉल डिटेल में इस बात के पर्याप्त सबूत मिले हैं कि कैप्टन अभिमन्यु की कोठी और परिवार को साजिश के तहत निशाने पर लिया गया था। 2 जुलाई को सीबीआइ द्वारा 54 लोगों के खिलाफ दायर चार्जशीट में जिन 11 नए लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें कई का सीधा संबंध कांग्रेस नेताओं से है।

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हरियाणा के वित्त मंत्री की कोठी में आग 19 और 20 फरवरी को लगाई गई, लेकिन इसकी साजिश 17 फरवरी को ही रच ली गई थी। आगजनी में कैप्टन की कोठी, गाडिय़ां और संपत्ति का करीब 14 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्हें मुआवजा दो करोड़ 80 लाख रुपये मिला है, जिसे गरीब कन्याओं के विवाह पर खर्च करने की योजना है। कांग्रेस नेता हालांकि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में अपने किसी हाथ से स्पष्ट इन्कार कर चुके हैं, मगर कैप्टन अभिमन्यु इससे सहमत नहीं हैं।

सीबीआइ जांच में एक ऑडियो टेप के आधार पर यह बात सामने आई है कि आंदोलनकारियों की बातचीत में 17 फरवरी को सुबह 11.23 बजे यह कहा गया है कि कैप्टन अभिमन्यु का घर घेर लिया गया है। चार्जशीट में अकेले कैप्टन ही नहीं, बल्कि सीएम के मीडिया एडवाइजर राजीव जैन के सोनीपत स्थित कॉलेज और कोठी में भी आगजनी किए जाने की रिपोर्ट का हवाला है।

सीबीआइ के आरोप पत्र में जो नए नाम शामिल किए गए हैं, उनमें अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक के नजदीकी अशोक बल्हारा का नाम भी प्रमुख है। इसके अलावा कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री कृष्णमूर्ति के बेटे गौरव हुड्डा, कांग्रेस के ही पूर्व विधायक बीबी बत्रा के पीए रह चुके सचिन दहिया के अलावा विजयदीप पंघाल, सुमित मलिक, राहुल हुड्डा, विजेंद्र, अरविंद गिल, भुवन सिंह, रक्षित और धीरज के संबंध भी कांग्रेस से बताए जाते हैैं।

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कैप्टन के घर की सिक्योरिटी किसने हटाई, इस पर रहस्य

कैप्टन अभिमन्यु के रोहतक आवास पर लगी सिक्योरिटी किसने हटाई, यह सवाल अभी तक कायम है। सीबीआइ भी अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। यदि कोठी पर सिक्योरिटी तैनात रहती तो हादसा होने से बच सकता था, मगर बड़ा सवाल यह है कि यह सिक्योरिटी सरकार, पुलिस प्रशासन अथवा किसी अधिकारी विशेष के कहने पर हटाई गई थी या फिर सिक्योरिटी कर्मचारी खुद ही डरकर भाग गए थे, इस बात के तथ्य सामने आने बाकी हैं।

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'गुनाहगार लोगों को सजा तो मिलनी ही चाहिए'

हरियाणा में रह रहे और यहां से बाहर के कुछ लोगों ने प्रदेश के भाईचारे को खराब किया है। इस हिंसा में 32 लोगों की जान गई। खुद मेरे परिवार ने भागकर जान बचाई। यह राजनीतिक षड्यंत्र था। खाप पंचायतें भी इस षड्यंत्र का विरोध कर चुकी हैं। मेरी किसी से कोई नाराजगी नहीं है, लेकिन गुनाहगार लोगों को सजा जरूर मिलनी चाहिए। हालांकि मैंने सीबीआइ की चार्जशीट पढ़ी नहीं है, लेकिन मुझे पता चला है कि मेरा घर फूंकने और परिवार के सदस्यों को जिंदा चलाने की साजिश में एक ही पार्टी और नेता के लोग शामिल हैं। मेरे परिवार को खत्म करने का किसी ने इशारा किया था।

                                                                                          - कैप्टन अभिमन्यु, वित्त मंत्री, हरियाणा।

Posted By: Sunil Kumar Jha