चंडीगढ़ [अनुराग अग्रवाल]। हाईकमान के एक फैसले ने हरियाणा के कांग्रेस दिग्गजों की परेशानी बढ़ा दी है। कांग्रेस हाईकमान ने निर्णय लिया है कि एक परिवार से एक ही व्यक्ति को चुनावी रण में उतारा जाएगा। हाईकमान अपने इस फैसले को लागू करने में सफल रहा तो कई धुरंधरों के टिकट पर कैंची चल सकती है। 

कांग्रेस हाईकमान के इस फैसले की जद में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कांग्रेस विधायक दल की नेता रह चुकी किरण चौधरी, कांग्रेस वर्किंग कमेटी सदस्य कुलदीप बिश्नोई और कांग्रेस नेता रणजीत सिंह का परिवार आ सकता है। इन दिग्गजों के परिवार में कांग्रेस के टिकट के कई-कई दावेदार हैैं।

कांग्रेस हाईकमान मौजूदा सभी 17 विधायकों को चुनावी रण में उतारने का फैसला पहले ही ले चुका है। यह सभी विधायक दो से चार बार चुनकर विधानसभा पहुंच चुके हैैं। मौजूदा 17 विधायकों में एकमात्र ललित नागर ऐसे हैैं, जो पहली बार चुनकर आए हैैं।

कांग्रेस में यदि एक परिवार से एक व्यक्ति को टिकट देने का सिद्धांत लागू हुआ तो इसके पहले शिकार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा होंगे। हुड्डा गढ़ी सांपला किलोई से विधायक बनते आ रहे हैैं। इस बार उनके पूर्व सांसद बेटे दीपेंद्र सिंह को भी विधानसभा चुनाव लड़ाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैैं। दीपेंद्र बादली से चुनाव लड़ सकते हैैं। पिता-पुत्रों के लिए धर्म संकट की स्थिति यह बन गई कि हुड्डा खुद ड्राप करेंगे या फिर दीपेंद्र को इस बार चुनावी रण से दूर रखेंगे।

कांग्रेस विधायक दल की नेता रह चुकी किरण चौधरी के परिवार में टिकट के तीन दावेदार हैैं। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. बंसीलाल की बहू किरण चौधरी तोशाम से चुनाव लड़ती रही हैैं। उनके जेठ रणबीर महेंद्रा बाढड़ा से टिकट के प्रबल दावेदार हैैं। चौ. बंसीलाल के दामाद सोमवीर लोहारू से विधानसभा टिकट मांग रहे हैैं। ऐसे में परिवार के सामने यह तय करना मुश्किल होगा कि किसे चुनावी रण में उतारा जाए और किसे बाहर रखा जाए।

पूर्व मुख्यमंत्री स्व. भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई के परिवार में भी टिकट के चार दावेदार हैैं। उनके भाई पूर्व उप मुख्यमंत्री चंद्रमोहन बिश्नोई कालका व पंचकूला सीटों पर टिकट के दावेदार हैैं। कुलदीप की धर्मपत्नी रेणुका बिश्नोई हालांकि इस बार हांसी से चुनाव नहीं लडऩे का संकेत दे चुकी हैैं, लेकिन उनकी जगह बेटे भव्य बिश्नोई के लिए टिकट की पैरवी की जा रही है। भव्य हिसार से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैैं।

कांग्रेस नेता रणजीत सिंह और डा. केवी सिंह एक ही परिवार से ताल्लुक रखते हैैं। रणजीत सिंह रानियां हलके और केबी सिंह डबवाली हलके से टिकटों के दावेदार हैैं। दोनों में से कोई भी चुनावी रण से हटने को तैयार नहीं हो सकता है। ऐसे में इन दिग्गजों के सामने हाईकमान के फैसले पर खरा उतरने की सबसे बड़ी चुनौती है।

हारे हुए नेताओं पर दांव न खेलने की बात हाईकमान तक नहीं पहुंचा सके तंवर

प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष डा. अशोक तंवर ने हारे हुए नेताओं को चुनावी रण से दूर रखने की पेशकश की है। तंवर यह बयान हालांकि सार्वजनिक मंच पर दे रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने इसकी पैरवी कांग्रेस हाईकमान में नहीं की है। इससे उनकी बात में खास गंभीरता नजर नहीं आ रही। हरियाणा कांग्रेस की मौजूदा अध्यक्ष कु. सैलजा ने कहा है कि परफारमेंस देखकर, नए चेहरों और महिलाओं के साथ युवाओं को टिकट दी जाएगी। यदि सैलजा अपनी इस कसौटी पर अमल कर पाने में सफल होती हैैं तो यह उनकी बड़ी उपलब्धि होगी।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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