चंडीगढ़, राज्‍य ब्‍यूरो। हरियाणा में कांग्रेस और भाजपा की हालत बिल्कुल जुदा है। हरियाणा कांग्रेस में दिग्‍गज नेताओं के झगड़े समाप्‍त नहीं हो रहे हैं। खासकर हरियाणा कांग्रेस अध्‍यक्ष कुमारी सैलजा और पूर्व मुख्‍यमंत्री कुमारी सैलजा के बीच खींचतान लगातार जारी है। इस कारण प्रदेश में कांग्रेस का संगठन तैयार नहीं हो पाया है। दूसरी ओर, हरियाणा भाजपा के अध्‍यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने पिछले एक साल में पार्टी का मजबूत संगठन तैयार कर लिया है।

हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ के एक साल के कार्यकाल में पार्टी का संगठन न केवल धरातल पर नजर आया, बल्कि अलग-अलग कारणों से घर बैठे कार्यकर्ता भी इस एक साल के भीतर सक्रिय रूप से फील्ड में दिखाई दिए। धनखड़ को आज ही के दिन भाजपा हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी थी। भाजपा नेताओं का कहना है कि अपने एक साल के कार्यकाल में धनखड़ जहां सरकार और संगठन के बीच सेतु के रूप में नजर आए, वहीं उन्होंने मेहनती, निष्ठावान, समर्पित कार्यकर्ताओं को उनकी क्षमता के मुताबिक संगठन का कामकाज भी सौंपा।

प्रदेश अध्यक्ष के रूप में एक साल के कार्यकाल में धनखड़ ने हासिल की कई उपलब्धियां

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के नाते ओमप्रकाश धनखड़ के एक साल के कार्यकाल की सबसे अधिक खास और चर्चित बात जो रही, वह पुराने व उपेक्षित नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने की है। एक समय पार्टी की पहली पंक्ति के नेताओं में शुमार इन दिग्गजों के साथ धनखड़ का संवाद लगातार जारी है। धनखड़ बिना बुलाए और बिना बताए इन पार्टी नेताओं के पास पहुंच जाते हैं और संगठन व सरकार के कामकाज पर घंटों मंत्रणा करते हैं। उनकी कार्यप्रणाली के इस अंदाज को पार्टी में काफी सराहा जा रहा है।

पुराने सक्रिय और उपेक्षित पार्टी नेताओं को साथ लेकर चलने पर रहा पूरा काफी फोकस

प्रदेश अध्यक्ष के रूप में ओमप्रकाश धनखड़ की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि उन्होंने धरातल पर न केवल संगठन तैयार कर दिया, बल्कि पार्टी में 15 नए विभाग और छह नए प्रकोष्ठों का भी गठन कर डाला। कांग्रेस दिग्गज प्रदेश व जिला स्तरीय संगठन खड़ा करने के लिए पिछले आठ साल से जिद्दोजहद में है। हुड्डा और सैलजा के बीच लड़ाई की वजह भी यही है कि दोनों संगठन में शामिल किए जाने वाले नेताओं व कार्यकर्ताओं के नाम तक तय नहीं कर पा रहे हैं।

धनखड़ को प्रदेश अध्यक्ष बनते ही समस्याओं का अंबार विरासत में मिला था। सबसे बड़ी चुनौती कोरोना काल में संगठन को खड़ा करने के साथ ही कार्यकर्ताओं को घर से बाहर निकालकर फील्ड में सक्रिय करने की थी, जिसे धनखड़ ने बखूबी निभाया है।

प्रदेश अध्यक्ष की टीम ने कोरोना में आक्सीजन कंसंट्रेटर की व्यवस्था करने के साथ ही महिला विंग की ओर से सेवा रसोई चलवाई तो यूथ विंग की ओर से रक्तदान शिविरों का आयोजन कराया है। जिला व राज्य स्तरीय बैठकों का सिलसिला तो थमा ही नहीं। धनखड़ ने अपनी कार्यकारिणी में पिछली सभी कार्यकारिणी के मुकाबले ज्यादा कार्यकर्ताओं को स्थान देकर उन्हें क्षमता के अनुसार काम करने का भरपूर मौका दिया है। धनखड़ के अध्यक्ष बनने से पहले वर्ष 2019 में 256 कार्यकर्ताओं को प्रदेश की कार्यकारिणी में स्थान मिला हुआ था, लेकिन धनखड़ ने अपनी टीम में 360 कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी है।

भाजपा में नए विभागों और प्रकोष्ठों के गठन में भी धनखड़ की कार्यप्रणाली पर आरएसएस की कार्यप्रणाली का असर साफ देखने को मिला है। जिस तरह संघ अपने कार्यक्रमों में सामाजिक सद्भाव एवं पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देता है, ठीक उसी तर्ज पर धनखड़ ने सामाजिक, प्राकृतिक और सद्भावना को प्राथमिकता में रखते हुए नए विभाग व प्रकोष्ठ बनाए।

अभी तक भाजपा के केवल 12 विभाग थे, लेकिन धनखड़ ने 15 और नए विभागों का गठन कर दिया, जिससे उनकी संख्या 27 हो गई। इसी तरह पिछली बार पार्टी में प्रकोष्ठों की संख्या भी मात्र 14 थी, लेकिन इस बार इनकी संख्या 20 हो गई है। धनखड़ के "सेवा प्रकोष्ठ" और 'एनजीओ प्रकोष्ठ' कोरोना काल में खासे सक्रिय दिखाई पड़े।

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'हम भविष्य के सांसद और विधायक तैयार कर रहे'

'' भाजपा ही एक ऐसी पार्टी है, जो भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर कार्यकर्ता तैयार कर रही है। पार्टी द्वारा गठित विभिन्न विभागों और प्रकोष्ठों में सामाजिक सरोकार के कार्य करने वाले कार्यकर्ता, भविष्य में जब भी चुनकर विधानसभा या लोकसभा में पहुंचेंगे तो उनका प्रशिक्षण पूरा हो चुका होगा और वे राजनीति में रहकर जनभावनाओं के मुताबिक बेहतर काम कर सकेंगे।

                                                                                 - ओमप्रकाश धनखड़, अध्यक्ष, हरियाणा भाजपा।

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Edited By: Sunil Kumar Jha