"सिविल अदालतों को इवैक्यूई संपत्ति तय करने का अधिकार नहीं" - HC का बड़ा फैसला, तीन दशक पुराने मामले को किया खारिज
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है कि सिविल अदालतों को यह तय करने का अधिकार नहीं है ...और पढ़ें

सिविल अदालतों को इवैक्यूई संपत्ति तय करने का अधिकार नहीं: HC
HighLights
सिविल अदालतें इवैक्यूई संपत्ति का दर्जा तय नहीं कर सकतीं
हाईकोर्ट ने 33 साल पुराने प्रवासी संपत्ति विवाद को खारिज किया
प्रशासन प्रवासी एक्ट की धारा 46 के तहत यह फैसला
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रवासी संपत्ति (Evacuee Property) से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सिविल अदालतों को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कोई संपत्ति इवैक्यूई संपत्ति है या नहीं।
कोर्ट ने 1993 से लंबित दूसरी अपील खारिज करते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा इवैक्यूई घोषित संपत्ति के स्वरूप को चुनौती देने वाला कोई भी सिविल मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है। यह फैसला 33 साल पुराने विवाद पर आया है।
दरअसल, याचिकाकर्ताओं रघुबीर एवं अन्य का दावा था कि विवादित भूमि एक उपभोग अधिकार बंधक के अंतर्गत थी, जिसे उन्होंने वर्ष 1945 में पाकिस्तान चले गए दीदार सिंह के पास गिरवी रखा था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इस प्रकार के बंधक को छुड़ाने (Redeem) की कोई समय-सीमा नहीं होती और इसलिए वे आज भी भूमि के मालिक और कब्जाधारी हैं।
उन्होंने निचली अदालतों के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनमें उनका दावा खारिज कर दिया गया था।
हालांकि, राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों ने यह दलील दी कि उक्त भूमि को पहले ही इवैक्यूई (प्रवासी) संपत्ति घोषित किया जा चुका है और बाद में उसे तीसरे प्रतिवादी को आवंटित भी कर दिया गया था। ऐसे में प्रशासन प्रवासी एक्ट 1950 की धारा 46 के तहत सिविल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र स्वत: समाप्त हो जाता है।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जगमोहन बंसल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कानून की धारा 46 सिविल अदालतों के अधिकार क्षेत्र पर साफ रोक लगाती है। अगर कोई संपत्ति प्रशासन द्वारा एवैक्यूई घोषित कर दी गई है, तो उसके स्वरूप को चुनौती देने वाला कोई भी सिविल मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है, चाहे विवाद कितना ही पुराना क्यों न हो।
हाईकोर्ट ने कहा कि कोई भी सिविल या राजस्व अदालत यह तय नहीं कर सकती कि कोई संपत्ति एवैक्यूई है या नहीं और न ही कस्टोडियन द्वारा की गई कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठा सकती हैं।
