राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। इंटर कंट्री बच्चे की कस्टडी के एक मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सोनीपत के पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया है कि वह मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए एक नाबालिग बच्चे को हाई कोर्ट के समक्ष पेश करे। साथ ही यह सुनिश्चित हो कि नाबालिग बच्चे को जिले की सीमा से बाहर न ले जाया जा सके। दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में फिलहाल ब्रिटेन में रह रही बच्ची की मां यह दिखा रही थी कि बच्चा उसके साथ ब्रिटेन में रह रहा है। पिता भारत में रहता है। पिता जब भी वीडियो काल करता तो जब वह बच्चे को देखता तब वह अधिकांश सोया रहता था। इस पर पिता को शक हुआ। उसने अपने बेटे की सुरक्षा को लेकर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। उसने आरोप लगाया कि बच्चा ब्रिटेन में न होकर सोनीपत में रहने वाले उसके ससुराल वालों की कस्टडी में अवैध रूप से है।

याचिका पर सुनवाई दौरान पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एसपी सोनीपत को आदेश दिया था कि सोनीपत में याची के ससुराल पक्ष के आवास का दौरा करने के लिए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को तुरंत तैनात करें व बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करें। संबंधित पुलिस अधिकारी यह भी सुनिश्चित करेंगे कि बच्चे को वीडियो कांफ्रेंसिंग मोड के माध्यम से सुनवाई की अगली तारीख पर अदालत के समक्ष पेश किया जाए।

हाई कोर्ट के जस्टिस एचएस सिद्धू ने जींद निवासी संदीप चुग की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिए हैं। इस मामले में, दंपती की शादी नवंबर 2010 में हुई थी। इसके बाद दो बच्चों का जन्म हुआ। बेटी 10 वर्ष व बेटा ढाई साल का है। शुरुआत में दंपती लंबे समय तक लंदन में रहा, लेकिन चाइल्डकेयर के लिए भारत वापस आ गया था। वह नोएडा में रहने लगे थे। दंपती के बीच वैवाहिक कलह के कारण पत्नी ने मार्च 2020 में याचिकाकर्ता को सूचित किए बिना घर छोड़ दिया। पति यानि याचिककर्ता उस समय विदेश में था। तब से इस जोड़े के बीच कटु संबंध थे और वैवाहिक विवाद संबंधित पुलिस और अदालतों के समक्ष विचाराधीन है।

याचिकाकर्ता के अनुसार, मई 2021 में उसकी पत्नी यूके चली गई और जब उसे इस के बारे में पता चला तो उसने नाबालिग बच्चों के संबंध में लंदन कोर्ट के न्याय परिवार प्रभाग के समक्ष एक आनलाइन आवेदन दायर किया था। इसमें उसने बच्चों के कल्याण को सुनिश्चित करने और पासपोर्ट व कई मांग के साथ भारत में बच्चों की संक्षिप्त वापसी की राहत की मांग की। इस पर पत्नी वीसी के माध्यम से लंदन में कोर्ट के सामने पेश हुई और कहा कि वह याचिकाकर्ता की जानकारी या सहमति के बिना बच्चों को भारत से लेकर आ गई थी। अपने 26 जुलाई के आदेश में कोर्ट के न्याय परिवार प्रभाग, लंदन ने पत्नी को निर्देश दिया कि वह बच्चों को याचिकाकर्ता के साथ वीडियो या टेलीफोन काल के माध्यम से प्रत्येक सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को संवाद कराए।

याची जब भी अपनी बेटी और बेटे के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग (जूम काल) मिलाता था उस समय याचिकाकर्ता ने नोट किया कि उसका बेटा ज्यादातर समय आधा सोता रहता है। कभी-कभी पत्नी कहती थी कि वह सो रहा है। जब भी वह अपने बेटे से बात करता था तो वह चुप हो जाता था। कांफ्रेंसिंग के दौरान बैकग्राउंड हमेशा छिपी रहती थी। इस वजह से याचिकाकर्ता को अपने बेटे के ठिकाने पर शक हुआ। 16 सितंबर को वह अपने परिवार के सदस्यों के साथ सोनीपत में अपने ससुराल गया और पाया कि उसका बेटा वहां रह रहा था और उसकी पत्नी ने इस तथ्य को छुपाया और लंदन की अदालत को यह गलत जानकारी दी कि वह लड़के को लंदन ले कर आ गई।

याचिकाकर्ता ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उसका ढाई साल का बेटा वर्तमान में याचिकाकर्ता के ससुराल वालों की अवैध हिरासत में है और पत्नी उसे छोड़कर यूके चली गई है। अब उसे आशंका है कि उसके बेटे को विदेश में या इस अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर किसी अन्य स्थान पर ले जाया जा सकता है, इसलिए कोर्ट इस मामले में उचित आदेश जारी करे।

Edited By: Kamlesh Bhatt