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रेलवे ट्रैक पर मिला हरियाणा पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे युवक का शव, माता-पिता को मिलेगा 8 लाख रुपये मुआवजा

Published: Thu, 05 Nov 2026 03:54 PM (IST)

अंबाला के पास रेलवे हादसे में हरियाणा पुलिस भर्ती के लिए जा रहे युवक हरदीप सिंह की मौत हो गई थी।

रेलवे हादसे में युवक की मौत, हाईकोर्ट ने दिया 8 लाख मुआवजे का आदेश।

रेलवे हादसे में युवक की मौत, हाईकोर्ट ने दिया 8 लाख मुआवजे का आदेश।

HighLights

  1. युवक की रेलवे हादसे में मौत, पुलिस भर्ती को जा रहा था।

  2. हाईकोर्ट ने रेलवे को 8 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।

  3. टिकट न मिलने पर दावा खारिज, हाईकोर्ट ने पलटा फैसला।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा पुलिस में भर्ती होकर वर्दी पहनने का सपना लेकर घर से निकले युवक की रेलवे हादसे में मौत हो गई। बेटे को खोने के बाद माता-पिता ने रेलवे से मुआवजे की मांग की, लेकिन रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल ने टिकट बरामद नहीं होने के आधार पर दावा खारिज कर दिया था। करीब आठ साल बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने यह फैसला रद करते हुए रेलवे प्रशासन को आठ लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।

जस्टिस हरकेश मनुजा ने भोल सिंह व एक अन्य की अपील स्वीकार की। मामला अंबाला सिटी रेलवे स्टेशन के पास हुए हादसे का है। हरदीप सिंह 8 अगस्त 2014 को अंबाला में हरियाणा पुलिस भर्ती की शारीरिक परीक्षा देने जा रहा था।

परिजनों के अनुसार, हरदीप दिल्ली के एक कालेज की कैंटीन में अपने दोस्त अक्षय कुमार के साथ काम करता था। वह 7 अगस्त 2014 को भर्ती परीक्षा के लिए दिल्ली से अंबाला रवाना हुआ। उसका दोस्त उसे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन छोड़ने गया था। अमृतसर सुपरफास्ट ट्रेन के देर से चलने की जानकारी मिलने पर अक्षय ने नई दिल्ली से अंबाला सिटी तक का टिकट खरीदकर हरदीप को दिया।

आरोप था कि सफर के दौरान अंबाला सिटी स्टेशन के पास अचानक झटका लगने से हरदीप ट्रेन से नीचे गिर गया और उसकी मौत हो गई। हादसे में उसका टिकट भी खो गया। हालांकि, रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल ने टिकट न मिलने और मंडल रेल प्रबंधक की जांच रिपोर्ट के आधार पर दावा खारिज किया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि युवक रेलवे लाइन पार करते समय ट्रेन की चपेट में आया।

हाईकोर्ट ने इस निष्कर्ष को साक्ष्यों के अनुरूप नहीं माना। अदालत ने कहा कि अक्षय कुमार ने गवाही दी थी कि उसने टिकट खरीदकर हरदीप को दिया था। मृतक के पास हरियाणा पुलिस की शारीरिक परीक्षा का प्रवेश पत्र भी मिला, जो यात्रा के उद्देश्य की पुष्टि करता है।

अदालत ने यह भी कहा कि जांच रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारी को ट्रिब्यूनल में पेश नहीं किया गया। ट्रेन के गार्ड, लोको पायलट या किसी प्रत्यक्षदर्शी की गवाही भी नहीं हुई, जिससे रेलवे लाइन पार करने की बात साबित हो सके। दुर्घटना में गंभीर चोटों और शरीर के क्षत-विक्षत होने से टिकट खो सकता है। इसलिए केवल टिकट बरामद न होना इस बात का निर्णायक प्रमाण नहीं है कि मृतक बिना टिकट यात्रा कर रहा था।

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