नई दिल्ली [बिजेंद्र बंसल]। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election) में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के कारणों की समीक्षा शुरू कर दी है। समीक्षा के शुरुआती सुझावों में सामने आया है कि बूथ और मंडल स्तर के कार्यकर्ताओं में पार्टी संगठन और नेतृत्व के प्रति नाराजगी है। इसे दूर करने के लिए पहले मंडल स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच जाना होगा। ऐसे में संगठन चुनाव के लिए सक्रिय सदस्यता की आड़ लेकर पार्टी अब 19 से 22 नवंबर तक शक्ति केंद्र से ऊपर के संगठन के कार्यकर्ताओं के बीच जाएगी। वहीं 22 नवंबर को सूरजकुंड में सायं 4 से 7 बजे तक पहले हारे हुए 50 प्रत्याशियों से उनकी हार के कारण पूछे जाएंगे। इसके बाद रात्रि भोजन से पहले जीते हुए 40 विधायकों के साथ बैठक होगी। 23 नवंबर को प्रदेश कार्यसमिति की बैठक होगी।

यह निर्णय नई दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में भाजपा की प्रदेश स्तरीय कोर कमेटी की बैठक में हुआ। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने की। इसमें मुख्यमंत्री मनोहर लाल सहित प्रदेश प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव डॉ.अनिल जैन, प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला, प्रदेश संगठन महामंत्री सुरेश भट्ट, केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह,कृष्णपाल गुर्जर, रतन लाल कटारिया, सांसद एवं प्रदेश महामंत्री संजय भाटिया, प्रदेश महामंत्री संदीप दीक्षित, नई सरकार में मंत्री अनिल विज व कंवर पाल गुर्जर, पूर्व मंत्री रामबिलास शर्मा, कैप्टन अभिमन्यु, ओमप्रकाश धनखड़ और पार्टी की राष्ट्रीय सचिव सुधा यादव ने हिस्सा लिया।

कोर कमेटी में पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह नहीं आए जबकि कंवरपाल गुर्जर को नए सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। अपेक्षित परिणाम न आने के कारणों पर इस बैठक में सिर्फ तीन केंद्रीय मंत्रियों और सांसद संजय भाटिया सहित सुधा यादव के विचार ही कलमबद्ध हो सके हैं। प्रदेश के संगठन महामंत्री से अलग खुद बीएल संतोष ने भी सांसदों की एक-एक बात को कलमबद्ध किया है।

आसान नहीं है बैठक में उठे बड़े सवालों का जवाब

कोर कमेटी की बैठक में यह सवाल भी उठा कि चुनाव के दौरान तीन जातियां भाजपा के खिलाफ वोट कर रही थीं मगर एक भी जाति ऐसी दिखाई नहीं दी कि जो खुलेआम भाजपा के पक्ष में हो। अन्यथा गुरुग्राम और सिरसा में निर्दलीय उम्मीदवारों को इतनी वोट कैसे मिलतीं। एक कद्दावर नेता ने जब यह मुद्दा उठाया कि गुरुग्राम में टिकट नहीं मिलने पर उनके पुतले फूंकने वाले सरकार में चेयरमैन रहे मगर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि इस कद्दावर नेता को यह भी बता दिया गया कि बात सिर्फ रेवाड़ी या गुरुग्राम की ही नहीं बल्कि नांगल चौधरी और पटौदी की भी होनी चाहिए। इस दौरान हेली मंडी नगर पालिका चेयरमैन से लेकर नांगल चौधरी में भाजपा के विरोध में चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी मूलाराम का विषय भी उठा।

मंडल स्तर के कार्यकर्ताओं के सम्मान का भी उठा मुद्दा

कोर कमेटी की बैठक में यह बात भी सामने आई कि जन आशीर्वाद यात्रा से पहले लोकसभा चुनाव के दौरान कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र को फिर से प्रधानमंत्री बनाने के लिए उत्साहित था। मगर लोकसभा जीतने के बाद उत्साहित कार्यकर्ता उस समय नाराज होने लगा जब दूसरे दलों से आने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को मंच पर जगह मिलने लगी।

पार्टी संगठन के धुरंधर नेता भी यह नहीं भांप पाए कि मंडल स्तर पर कार्यकर्ता किस हाल में हैं क्योंकि उनकी पहुंच तो सिर्फ जिला स्तर तक ही थी। बड़े नेताओं के अभिमान और प्रदेशाध्यक्ष, जिलाध्यक्ष को 'भगवान' का दर्जा मिलने से भी निचले स्तर के कार्यकर्ताओं ने चुनाव में सिर्फ अपनी वोट तो भाजपा को डाली मगर पड़ोसी या अपने घर परिवार में भी वोट कमल को देने के लिए प्रेरणा नहीं दी।

पॉलिटिक्स की तरह जुबान पर आया टेक्टिस शब्द

कोर कमेटी की इस बैठक में पॉलीटिक्स की तरह टेक्टिस शब्द भी भाजपा नेताओं की जुबान पर आया। भाजपा के एक सुलझे हुए नेता ने कहा कि कुछ क्षेत्र विशेष में भाजपा को हराने के लिए मतदाता एकजुट हुए। उन्होंने उन क्षेत्रों में जाति, पार्टी से अलग सिर्फ यह टेक्टिस अपनाई कि कौन प्रत्याशी भाजपा को हरा सकता है। इसके लिए इस नेता ने बादली और नारनौंद विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण दिया।

कोर कमेटी की बैठक में भी गूंजी विज के डंडे की धमक

बैठक की शुरूआत में ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अनिल विज की तरफ इशारा करते हुए कहा कि विज का डंडा आजकल खूब चल रहा है। हाजिर जवाब विज बोले- आपने डंडा दिया भी तो इसलिए ही था। फिर क्या था बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने जोरदार ठहाका लगाया। प्रदेश प्रभारी डॉ. अनिल जैन व पूर्व मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने भी विज की बात पर मुहर लगाई।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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