हरियाणा में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की दुर्गंध से मिलेगी राहत, 24 STP पर लगेंगे एक्टिवेटेड कार्बन सिस्टम; 38.6 करोड़ होंगे खर्च
हरियाणा सरकार 24 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों पर एक्टिवेटेड कार्बन सिस्टम लगाएगी, जिससे दुर्गंध की समस्या से राहत मिलेगी और उपचारित ...और पढ़ें

, 24 STP पर लगेंगे एक्टिवेटेड कार्बन सिस्टम (फाइल फोटो)
HighLights
24 एसटीपी पर लगेंगे एक्टिवेटेड कार्बन सिस्टम
दुर्गंध कम होगी, उपचारित पानी की गुणवत्ता सुधरेगी
38.65 करोड़ रुपये होंगे खर्च, जल पुन: उपयोग बढ़ेगा
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के आसपास फैलने वाली दुर्गंध से लोगों को राहत दिलाने की तैयारी है। दुर्गंध कम करने के लिए 24 एसटीपी पर एक्टिवेटेड कार्बन आधारित सिस्टम लगाए जाएंगे। इस पर करीब 38.65 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा ने बुधवार को समीक्षा बैठक में निर्देश दिया कि ट्रीटेड पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रभावी कदम उठाएं। किसानों की शिकायतों का प्राथमिकता से समाधान करें।
25 करोड़ रुपये से अधिक प्रमुख प्रोजेक्ट की होगी समीक्षा
इस दौरान 25 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली प्रमुख परियोजनाओं की सर्किलवार समीक्षा की गई। अंबाला सर्किल के छछरौली, पिंजौर के माणकपुर और बराड़ा के मौजगढ़ रोड स्थित एसटीपी में एक्टिवेटेड कार्बन सिस्टम लगाने का प्रस्ताव है।
हिसार सर्किल में हिसार के ऋषि नगर, राजगढ़ रोड, कैमरी रोड और सातरोड, हांसी में लालपुरा रोड, भिवानी रोड, नारनौंद में हांसी-जींद रोड, जींद सर्किल में हांसी रोड, पुराना हांसी रोड और नरवाना रोड, जुलाना में सीएचसी के नजदीक तथा सफीदों के गांव रामपुरा स्थित एसटीपी इस योजना में शामिल हैं।
सिरसा सर्किल में फतेहाबाद के खराती खेड़ा रोड, फतेहाबाद में भट्टू रोड, भूना में कुलां रोड, भिवानी सर्किल में भिवानी के दादरी रोड और धाना रोड, सिवानी में तोशाम रोड तथा लोहारू में श्मशान घाट के नजदीक स्थित एसटीपी पर एक्टिवेटेड कार्बन आधारित सिस्टम के जरिए ट्रीटेड वेस्ट वाटर की दुर्गंध कम करने और उसके पुनः उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा।
गुणवत्ता पर न हो समझौता, अधिकारियों को दिए गएनिर्देश
गंगवा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास कार्यों में तेजी लाने के साथ गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता न हो। आला अधिकारी केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि नियमित रूप से फील्ड में जाकर पेयजल आपूर्ति व्यवस्था, पानी की गुणवत्ता और चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण करें। जहां भी कमी या शिकायत सामने आए, उसका तुरंत समाधान सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि ट्रीटेड वेस्ट वाटर का सिंचाई सहित अन्य कार्यों में दोबारा उपयोग बढ़ाने के लिए उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी है। किसानों को इस पानी के इस्तेमाल में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। एसटीपी के आसपास दुर्गंध की समस्या हो या ट्रीटेड पानी की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायत, अधिकारी मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लें और समयबद्ध समाधान करें।
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