जेएनएन, चंडीगढ़। इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के दोनों बेटों के बीच तलवारें बेशक खींच गई हैं, लेकिन उनका प्‍यार खत्‍म न‍हीं हुआ है। अजय चाैटाला जहां छोटे भाई पर निशाना साधते हैं, लेकिन साथ ही अपना सबसे अजीज भी बताते हैं। इसी तरह अभय चौटाला का भी बड़े भाई से लगाव लाख कटुता के बाद भी साफ झलकता है। अभय ने कहा, मुझे पूरी उम्‍मीद हैं कि अजय चौटाला वापस लौटेंगे। मुझे पता है मेरे लिए कटु शब्‍द बोलने के बाद बड़े भाई रात भर सोए नहीं होंगे।

प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में अभय चौटाला बड़े भाई को लेकर भावुक दिखे। अभय ने कहा कि बड़े भाई अजय चौटाला ने मेरे लिए जो शब्द प्रयोग किए हैं, उनका मुझे तो दुख है ही लेकिन ऐसे शब्दों का प्रयोग करके रात को सोए वह भी सोए नहीं होंगे। वह भाई होने के संग सदा एक दोस्त की भांति साथ निभाते आए हैं।

अभय चौटाला ने कहा कि बंसीलाल तथा भजनलाल ने भी कांग्रेस से अलग होकर अलग पार्टी बनाई थी लेकिन बाद में कांग्रेस में वापस लौट गए। पार्टी बनाना और उसको चलाना कोई आसान काम नहीं है। जाने वह लोग किस षड्यंत्र का शिकार हो गए, समझ में नहीं आ रहा। उन्होंने कहा कि जो लोग यह दावा कर रहे थे कि जींद की रैली में पार्टी के आधे से ज्यादा विधायक तथा पदाधिकारी उनके साथ दिखाई देंगे, आज उस झूठ की हवा निकल गई। जब जींद की बैठक में लोग शामिल नहीं हुए तो अलग पार्टी का ऐलान कर दिया।

अभय ने दावा किया कि अजय व दुष्यंत तथा उनके समर्थकों के बाहर जाने से पार्टी को कोई नुकसान नहीं हुआ है बल्कि पार्टी का नुकसान कर रहे लोग बेकनाब हो गए है। उन्होंने दुख जताया कि दुष्यंत व दिग्विजय ओम प्रकाश चौटाला से न जेल में मिलने गए और न ही अस्पताल में। लोगों को झूठ बोलकर गुमराह कर रहे थे कि ओम प्रकाश चौटाला के हस्ताक्षर फर्जी है, लेकिन सच्चाई सामने आने पर लोगों ने ही उन्हें नकार दिया।

अभय चौटाला ने कहा कि वह तो आज तक इस कोशिश में थे कि वे अपनी गलती मान लेते और जींद की बैठक को रद करके चंडीगढ़ की बैठक में शामिल होते तो सारा मामला ही सुलझ जाता। उन्हें गोहाना रैली की गलतियों को स्वीकार कर लेना चाहिए था। उन्होंने कहा कि जींद की बैठक इनेलो को कमजोर करने का प्रयास था जो सफल नहीं हो सका।

अभय चौटाला ने कहा, मेरे सामने कोई देवीलाल और ओम प्रकाश चौटाला का अपमान कर दे, मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता। करण सिंह दलाल ने जब सदन में देवीलाल का अपमान किया तो इसी बात को लेकर उनसे विवाद हुआ था। अजय और उनके पुत्रों के सामने कोई यह कह रहा है कि ओमप्रकाश चौटाला का युग खत्म हो गया और उन्होंने इसे बर्दाश्त कर लिया। वह जल्द ही तथ्यों के साथ पर्दाफाश करेंगे कि परिवार के लड़ाई के पीछे किसने षड्यंत्र रचा।

अभय चौटाला ने कहा कि 2014 में विधानसभा चुनाव के दौरान से ही दुष्यंत की मंशा को भांप गए थे। वह लगातार उनकी गतिविधियों को निगाह बनाए हुए थे लेकिन बच्चे समझकर हर गतिविधि को नजरअंदाज कर रहे थे कि धीरे-धीरे अपने आप लाइन पर आ जाएंगे।

पार्टी ने भाई, भाभी और भतीजों को क्या नहीं दिया

अभय  चौटाला ने  भाई अजय चौटाला, भाभी नैना चौटाला और भतीजे दुष्यंत चौटाला पर जमकर राजनीतिक हमला बोला। अभय ने प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्यों का भरोसा जीतते हुए उन्हीं से सवाल पूछा कि पार्टी ने इन लोगों को क्या नहीं दिया।

अभय चौटाला ने माना कि 5 अगस्त की इनसो की कैथल रैली में ही विवाद खड़ा करने की पृष्ठभूमि तैयार कर ली गई थी। इस रैली में मुझे बुलाया नहीं गया और मेरे भाषण में व्यवधान डालने की कोशिश हुई। ओम प्रकाश चौटाला तभी कठोर फैसला लेना चाहते थे, लेकिन मैंने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया था।

अभय बोले, मैंने कल रात भी सुलह का प्रयास किया, लेकिन अगले दिन सुबह ही वे लोग अलग झंडे और डंडे की बात करने लगे। मेरी और अशोक अरोड़ा की अजय से बातचीत हुई थी। हमने उन्हें यह भी कहा कि यदि भाभी नैना चौटाला को विपक्ष का नेता बनाना चाहते हो तो हम इसके लिए भी तैयार हैं। दरअसल यह लड़ाई सीएम या विपक्ष के नेता की नहीं, बल्कि कुछ और ही है।
 

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