जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा में डॉक्टरों की भर्ती एक बार फिर राज्य लोक सेवा आयोग (State public service commission) के माध्यम से कराने की तैयारी है। राज्य के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी के चलते इस भर्ती को लोक सेवा आयोग के दायरे से बाहर निकाल दिया गया था। प्रदेश सरकार ने व्यवस्था की थी कि डॉक्टरों की भर्ती स्वास्थ्य महानिदेशक के जरिये डायरेक्ट (सीधे) होगी, ताकि भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो सके और डॉक्टरों को नियुक्ति के बाद तुरंत सरकारी अस्पतालों में ड्यूटी पर भेजा जा सके।

हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग द्वारा डॉक्टरों की नई भर्तियां निकाले जाने के बावजूद मुख्यमंत्री कार्यालय ने उस पर रोक लगा दी है। भर्ती पर रोक के बाद स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने मुख्यमंत्री कार्यालय में दो बार भर्ती के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजे, मगर उन्हें स्वीकार नहीं किया गया। मुख्यमंत्री कार्यालय ने सुझाव दिया है कि डॉक्टरों की सीधी भर्ती के बजाय इसे हरियाणा लोकसेवा आयोग के दायरे में लाया जाए। ऐसा करने के लिए फिर से कैबिनेट की बैठक बुलानी होगी। इसके बाद ही हरियाणा लोक सेवा आयोग डॉक्टरों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू करेगा।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने डॉक्टरों की भर्ती के लिए लिखित परीक्षा भी अनिवार्य करने का सुझाव दिया है। इस पूरे मामले को गृह मंत्री के सीआइडी प्रकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों का यह भी कहना है कि लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती नहीं होने की वजह से अच्छे डॉक्टरों की भर्तियां नहीं हो रही थी। डॉक्टरों ने भी मनमाना वेतन मांगना शुरू कर दिया था, जिस कारण डॉक्टरों की भर्ती को दोबारा हरियाणा लोक सेवा आयोग के दायरे में लाने पर विचार करना पड़ा है।

बता दें कि पिछले कई दिनों से राज्य की राजनीति में सीआइडी प्रकरण छाया हुआ है। सीआइडी गृह विभाग के अधीन रहेगी या फिर अलग विभाग बनेगा, इसे लेकर सरकार में तनातनी का माहौल है। इसके बाद शहरी निकाय विभाग को तोड़कर नगर निगम व नगर परिषदों को अलग स्वायतता देने की बात चली। अब डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर नया विवाद छिड़ गया है। इसे संयोग ही कहा जाए कि तीनों ही विभाग अनिल विज के हैैं, जिन पर विवाद की स्थिति बन रही है।

हरियाणा में 1000 डॉक्टरों की कमी

हरियाणा में डॉक्टरों के कुल 3240 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 2451 पद भरे हुए हैं, लेकिन अस्पतालों में लगभग 2250 डॉक्टर ही सेवा दे रहे हैं। 125 डॉक्टर बिना सूचना के गैरहाजिर चल रहे हैं। इन डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त करने के लिए नोटिस जारी हो चुके हैं। 60 से अधिक डॉक्टर ऐसे हैं, जो पोस्ट ग्र्रेजुएट (पीजी) की पढ़ाई के लिए छुट्टी पर हैं।

शुरू हो चुकी थी 790 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया

हरियाणा सरकार ने हाल ही में डॉक्टरों के 790 पदों पर भर्ती करने का निर्णय लिया था। इनमें से 400 डॉक्टरों की नियमित और बाकी खाली पदों पर अनुबंध के आधार पर भर्ती होनी थी। नियमित भर्ती के लिए पहले मुख्यमंत्री ने मुहर लगवाई गई। फिर वित्त मंत्रालय से मंजूरी ली गई। तब 2 जनवरी को 400 पदों के लिए विज्ञापन जारी हुआ। आवेदन की आखिरी तारीख 22 जनवरी है। अब इस भर्ती को हरियाणा लोक सेवा आयोग के दायरे में लाया जा रहा है।

हुड्डा, किरण और अभय उठाएंगे मुद्दा

हरियाणा विधानसभा में डॉक्टरों की कमी के मुद्दे पर जमकर घमासान होने के आसार हैैं। राज्य के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों कम संख्या के कारण स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हो रही हैं। हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कांग्र्रेस विधायक दल की पूर्व नेता किरण चौधरी और विधानसभा में ही विपक्ष के पूर्व नेता अभय सिंह चौटाला डॉक्टरों की कमी के मुद्दे को जोरदार ढंग से उठा सकते हैैं।

मैैं पता करूंगा, भर्ती प्रक्रिया क्यों रोकी गई

स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज का कहना है कि हम डॉक्टरों की भर्ती के लिए जोरदार तरीके से काम कर रहे हैैं। भर्ती के लिए डॉक्टरों के बड़ी संख्या में आवेदन भी आ चुके हैैं। मुझे पता चला कि किन्हीं कारणों से भर्ती प्रक्रिया को रोक दिया गया है। इस भर्ती को क्यों रोका गया है, इसकी मुझे न कोई जानकारी है और न ही किसी ने बताया है। मैैं पता करूंगा कि ऐसा क्यों हुआ।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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