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भूपेंद्र सिंह हुड्डा के धुर विरोध रहे कांग्रेस के पूर्व हरियाणा अध्यक्ष अशोक तंवर ने बनाया अपना भारत मोर्चा

गांधी परिवार के नजदीकी रहे व हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के विरोध पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवक ने अपने नए राजनीतिक मोर्चे का गठन कर दिया है। तंवर ने कहा कि आज के दौर में विपक्ष गूंगा बन चुका है और सत्ता पक्ष बहरा।

By Kamlesh BhattEdited By: Published: Thu, 25 Feb 2021 02:58 PM (IST)Updated: Thu, 25 Feb 2021 08:49 PM (IST)
भूपेंद्र सिंह हुड्डा के धुर विरोध रहे कांग्रेस के पूर्व हरियाणा अध्यक्ष अशोक तंवर ने बनाया अपना भारत मोर्चा
अपना भारत मोर्चा का गठन करने वाले अशोक तंवर। फाइल फोटो

जेएनएन, चंडीगढ़। कभी गांधी परिवार के नजदीकी रहे और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के धुर विरोधी डा. अशोक तंवर अपने अलग राजनीतिक मोर्चे का गठन कर दिया है। तंवर ने नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में नए राजनीतिक दल अपना भारत मोर्चा का गठन किया। जनता के लिए, जनता द्वारा, जनता का मोर्चा बताते हुए तंवर ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक हालातों में विपक्ष गूंगा है, सरकार बहरी है। ऐसे में अपना भारत मोर्चा देश की वर्तमान परिस्थितियों को देखकर और सुनकर बोलेगा। 

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अशोक तंवर ने डिजिटल माध्यम से मोर्चे के गठन का एलान किया। चंडीगढ़ प्रेस क्लब में अशोक तंवर की पत्नी अवंतिका तंवर माकन मौजूद रही। इसी तरह अलग-अलग जगहों पर तंवर के समर्थक मौजूद रहे। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव, यूथ कांग्रेस के प्रभारी और हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके पूर्व सांसद अशोक तंवर नवगठित मोर्चे के जरिये अपनी राजनीतिक गतिविधियों को अंजाम देंगे।

सिरसा से सांसद रह चुके अशोक तंवर हरियाणा को अपनी कर्मभूमि बनाएंगे। तंवर ने मोर्चा बनाने का फैसला अचानक नहीं लिया। इसके लिए उन्होंने कांग्रेस छोडऩे के बाद से प्रदेश भर में माहौल बनाना शुरू कर दिया था। 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान अभय सिंह चौटाला, दुष्यंत चौटाला और कुछ भाजपा नेताओं ने तंवर को अपने साथ जोड़नेे की पूरी कोशिश की। तंवर ने चाय सबकी पी, लेकिन आखिर में अकेले ही अपने कार्यकर्ताओं के बूते राजनीतिक लड़ाई लडऩे का अहम निर्णय लिया है।

पांच साल आठ माह तक हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके अशोक तंवर और पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा के बीच विवाद तब शुरू हुआ था, जब 2014 के चुनाव में तंवर की पसंद के उम्मीदवारों की अनदेखी की गई। 2019 में भी चुनाव से पहले ऐसे ही हालात बने, जिस कारण उन्हें कांग्रेस को अलविदा कहना पड़ा। कांग्रेस छोडऩे के बाद तंवर ने तत्कालीन पार्टी प्रभारियों पर खूब आरोप लगाए थे। तंवर दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन हर वर्ग में उनके समर्थक हैं। हरियाणा कांग्रेस की अध्यक्ष बनने के बाद कु. सैलजा ने तंवर को पार्टी में लाने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाई। इस दौरान तंवर के प्रदेशव्यापी दौरे और जिलों में जलपान कार्यक्रम चलते रहे।

पूर्व सांसद डा. अशोक तंवर का कहना है कि सरकार बहरी और विपक्ष गूंगा हो चुका है। लिहाजा उन्होंने जनता की आवाज उठाने के लिए मोर्चे के जरिये राजनीतिक गतिविधियां शुरू करने का निर्णय लिया है। बता दें, हरियाणा के मुख्यमंत्री रह चुके स्व. देवीलाल ने 1971 में कांग्रेस छोड़ दी थी। देवीलाल ने 1982 में लोकदल की स्थापना की। हरियाणा के पूर्व सीएम बंसीलाल ने हरियाणा विकास पार्टी बनाई, जबकि पूर्व सीएम भजनलाल और उनके बेटे कुलदीप बिश्नोई ने हरियाणा जनहित कांग्रेस बनाई थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा और पूर्व मंत्री निर्मल ङ्क्षसह ने भी अलग पार्टियां बनाई। इसके अलावा राज्य में पूर्व मंत्री गोपाल कांडा की हरियाणा लोकहित पार्टी और पूर्व राज्यसभा सदस्य केडी सिंह की तृणमूल कांग्रेस भी यहां है।


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