चंडीगढ़, जेएनएन। KMP Express Way: यदि आप कुंडली मानेसर पलवल एक्‍सप्रेस वे (Kundli Manesar Palwal Express Way) से होकर सफर करने जा रहे हैं तो आने वाली दुश्‍वारियों से बाखबर हो जाएं। अन्‍यथा आप परेशानी में फंस सकते हैं। दरअसल, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने तथा प्रदूषण को कम करने के साथ ही अंतरराज्यीय परिवहन को सुविधाजनक बनाने के लक्ष्य के साथ कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस वे की परिकल्पना की गई थी। लेकिन इसके निर्माण के समय कई बातों और आवश्‍यक सुविधाओं का ध्‍यान नहीं रखा गया। इस वजह से एक्‍सप्रेस वे से सफर मुश्किल भरा हो गया है।

केएमपी एक्‍सप्रेस वे 2009 में 11 साल पहले यह परियोजना पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन राजनीतिक व आर्थिक कारणों की वजह से ऐसा हो न सका। दो साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 135.6 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का लोकार्पण कर देशवासियों को बड़ा तोहफा दिया। एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने का सफर आसान हो गया। दिल्ली पर प्रदूषण और वाहनों के जाम का बोझ कम हो गया। मगर यह सफर न तो सुरक्षित है और न ही सुविधाजनक।

न बिजली की सुविधा, न टायलेट, न पंचर की दुकान, न मेडिकल शाप और न ढाबे

केएमपी को यदि हादसों और मौत का सफर भी कह दिया जाए तो कोई गलती नहीं होगी। यह एक्सप्रेस वे एक तरह का रिंग रोड है। इस मार्ग से होते हुए हर दिन करीब 50 हजार बड़े और छोटे वाहन दिल्ली में एंट्री किए बगैर हरियाणा और दूसरे राज्यों में आते-जाते हैं। इस एक्सप्रेस वे को बनाने का मकसद मूल रूप से यह था कि हरियाणा को बाकी राज्यों के साथ एक हाई स्पीड नेटवर्क से भी जोड़ा जा सके, लेकिन यदि आप इस एक्सप्रेस वे पर अपने परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं तो वह किसी सूरत में खतरों से खाली नहीं है।

गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो जाए तो रास्ते में कोई पूछने वाला नहीं, खुद करना होगा इंतजाम

केएमपी पर पूरे रास्ते में रात को लाइट की सुविधा नहीं है। इस एक्सप्रेस-वे पर पोल (खंभे) तो खड़े हैं, मगर उन पर लाइटें आज तक नहीं लग पाई हैं। 136 किलोमीटर लंबे इस सफर में रास्ते में न तो टायलेट है और न ही कोई खाने-पीने की दुकान। पेट्रोल पंप की सुविधा से वंचित इस एक्सप्रेस वे पर यदि आपकी गाड़ी खराब हो जाए, पंचर हो जाए या उसमें हवा डालने की जरूरत हो तो वह काम भी नहीं हो सकेगा, क्योंकि यहां ऐसी कोई सुविधा मौजूद नहीं है। दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले लाने के लिए क्रेन की सुविधा के साथ पुलिस की पेट्रोलिंग भी केएमपी पर नहीं होती है।

फिलहाल सर्दी और धुंध का मौसम है। शाम छह बजते ही घना कोहरा छाने लगता है। वाहन मालिक अपनी जान हथेली पर रखकर केएमपी पर सफर करते हैं। चूंकि ट्रक चालकों को आगे-पीछे चलने की बजाय अगल-बगल चलने की आदत है, इसलिए यदि आप अपने परिवार के साथ गाड़ी में हैं और खुद ड्राइव कर रहे हैं तो इसमें कोई दोराय नहीं कि आप खुद की और अपने पूरे परिवार की जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। इस एक्सप्रेस वे पर गड्ढे भी तमाम हो गए। उबड़-खाबड़ रास्ते दुर्घटनाओं का बड़ा कारण हैं। यहां हर रोज कम से कम 50 छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं।

राव नरबीर नहीं देना चाहते थे कंपलीशन सर्टिफिकेट

हरियाणा के तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री राव नरबीर ने केएमपी की निर्माता कंपनी को कंपलीशन व फिटनेस सर्टिफिकेट देने से पहले खुद अपनी गाड़ी में सफर किया था। तब उन्होंने इसे असुरक्षित मानते हुए कंपनी को कंपलीशन व फिटनेस सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया था, लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय के एक बड़े अधिकारी ने तत्कालीन मंत्री की मर्जी के बगैर कंपनी को सर्टिफिकेट प्रदान कर दिए थे। उसी का खामियाजा आज देश की जनता भुगत रही है।

सर्टिफिकेट हासिल होने के बाद अब कंपनी को इस मार्ग पर जनसुविधाएं खासकर बिजली की सुविधा प्रदान करने की कोई चिंता नहीं है। हरियाणा औद्योगिक आधारभूत संरचना इकाई (एचएसआइआइडीसी) के अंतर्गत बने इस एक्सप्रेस-वे के सफर को सुविधाजनक बनाने की दिशा में संबंधित अधिकारियों ने भी आज तक कोई रुचि नहीं दिखाई है।

दुष्यंत चौटाला अफसरों संग करें सफर तो पता चलेंगी खामियां

विशेषज्ञों और यहां से गुजरने वाले लोगों का कहना है कि हरियाणा के पीडब्ल्यूडी मंत्री के नाते डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला यदि विभाग के अधिकारियों व एचएसआइआइडीसी के प्रबंधकों के साथ इस एक्सप्रेस-वे पर आने-जाने का सफर तय करें तो उन्हें लोगों खासकर वाहन चालकों को आने वाली दिक्कतों का अहसास हो सकेगा। पुरुष तो खुले में मूत्र विसर्जन कर सकते हैं, लेकिन महिलाओं के लिए खास दिक्कतें हैं। इस रोड पर कोई डिस्पेंसरी या असपताल अथवा मेडिकल स्टोर या ढाबा भी नहीं है, जहां रुककर लोग राहत महसूस कर सकें।

हरियाणा के आधा दर्जन जिलों से सीधे कनेक्ट है केएमपी

इस एक्सप्रेस-वे पर हलके वाहनों के लिए निर्धारित गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी कामर्शियल वाहनों के लिए 100 किलोमीटर प्रति घंटा तय है। केएमपी पर कुल 117 अंडरपास बनाए गए हैं। चार आरओबी का काम पूरा हो चुका। केएमपी पर सात टोल प्लाजा है, जहां केजीपी की तर्ज पर एक्जिट (निकासी) प्वाइंट पर टोल वसूला जाता है। इस एक्सप्रेस वे से हरियाणा के आधा दर्जन जिले फरीदाबाद, पलवल, गुरुग्राम, सोनीपत, पानीपत, झज्जर और रोहतक प्रमुख रूप से जुड़े हुए हैं।

 

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