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पलवल में नशा मुक्ति के नाम पर 'धोखा', बिना डॉक्टर की सलाह के दी जा रहीं दवाइयां; जानलेवा बन रहा पुनर्वास केंद्र

Published: Sun, 25 Oct 2026 05:11 PM (IST)

पलवल में अवैध नशा मुक्ति केंद्र का भंडाफोड़ हुआ है। इन केंद्रों में जो मरीजों को दवा दी जा रही ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड

HighLights

  1. पलवल में अवैध नशा मुक्ति केंद्र सक्रिय।

  2. मरीजों से अमानवीय व्यवहार, बिना सलाह दवा।

  3. कई मरीजों की मौत, प्रशासन की कार्रवाई जारी।

जागरण संवाददाता, पलवल। जिले में वैध नशा मुक्ति केंद्र के अभाव में अवैध नशा मुक्ति केंद्र धड़ल्ले से फल-फूल रहे हैं। नशे के दलदल में फंसे युवाओं को उबारने के नाम पर संचालित ये केंद्र लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं।

हालांकि प्रशासन द्वारा समय-समय पर ऐसे ठिकानों पर छापेमार कार्रवाई की जाती है, लेकिन इसके बावजूद इनका अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है।

डाक्टर की सलाह के बिना दी जाती हैं दवाइयां

ये फर्जी केंद्र नशा छुड़ाने की एवज में पीड़ितों से चार हजार से लेकर आठ हजार रुपये प्रति माह तक वसूलते हैं। इन केंद्रों मेनशा छुड़ाने के लिए मरीजों के साथ अमानवीय बर्ताव किया जाता है। नशे की लत छुड़ाने के नाम पर युवकों के साथ बेरहमी से मारपीट की जाती है।

मरीजों को बिना किसी योग्य डाक्टर की सलाह या देखरेख के दवाइयां दी जाती हैं। प्रशासन द्वारा पहले भी सख्त कदम उठाए जा चुके हैं। हर साल तीन से चार नशा मुक्ति केंद्र पकड़े जाते हैं। इसी साल अप्रैल माह में भाटिया कालोनी स्थित एक अवैध नशा मुक्ति केंद्र पर छापेमारी कर मामला दर्ज किया गया था, लेकिन इसके बावजूद ऐसे केंद्र गांवों और कालोनियों में सक्रिय हैं।

नशा मुक्ति केंद्रों में हो चुकी हैं मौतें

अवैध और बेलगाम चल रहे इन केंद्रों की लापरवाही कई बार जानलेवा साबित हुई है। वर्ष 2022 में कृष्णा कालोनी के रहने वाले विजय की राम नगर स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र में तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई थी।स्वजन ने केंद्र संचालक पर गंभीर मारपीट और प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। इसी प्रकार, कैंप थाना अंतर्गत राजस्थान के जुरहेड़ा गांव के रहने वाले 35 वर्षीय दीपक की भी एक नशा मुक्ति केंद्र में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है।

नशे का हॉटस्पॉट बने शहर के कई इलाके

नशे की गिरफ्त में आकर पलवल के कई परिवार तबाह हो चुके हैं। युवाओं में शराब के साथ गांजा, सुल्फा, ड्रग्स और इंजेक्शन के जरिए नशा करने की लत तेजी से बढ़ रही है।

शहर की करीब एक दर्जन कालोनियां और मोहल्ले नशे के बड़े हाटस्पाट बन चुके हैं। कई बार सीएम फ्लाइंग और जिला प्रशासन ने छापेमारी कर इन फर्जी केंद्रों का पर्दाफाश किया है, लेकिन विडंबना यह है कि पलवल जिले में आज तक कोई अधिकृत या सरकारी नशा मुक्ति केंद्र स्थापित नहीं हो पाया है।

एक साल से चल रहा था अवैध नशा मुक्ति केंद्र

शनिवार को असावटा गांव में पकड़े गए नशा मुक्ति केंद्र को अमित नाम का युवक चला रहा था। अमित ने ग्रेजुएशन की हुई है। यह इमारत भी उसी की थी। करीब एक साल से अमित इस केंद्र को चला रहा था। इस केंद्र में मिले 72 मरीजों में से आधे पलवल जिले के हैं, जबकि बाकी आसपास के जिलों के हैं।

अभी मरीज केंद्र में ही पुलिस के निगरानी में हैं। उनका मेडिकल और अन्य स्वास्थ्य जांच कराकर उनके स्वजन के हवाले करने की प्रक्रिया की जा रही है।

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