पलवल में खुले नाले बने मौत का कुआं, प्रशासन की लापरवाही से बड़ा हादसा
पलवल में न्यू सोहना रोड पर एक स्कूटी सवार खुले नाले में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया, जिससे प्रशासन की लापरवाही फिर उजागर हुई।

पलवल में खुले नाले बने मौत का कुआं ( एआई इमेज )
HighLights
स्कूटी सवार खुले नाले में गिरा, गंभीर चोटें आईं।
पुलिस ने मदद से किया इनकार, संवेदनहीनता उजागर।
प्रशासन की लापरवाही पर जनता में गहरा आक्रोश।
अशोक कुमार यादव, पलवल। पलवल में प्रशासन की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता एक बार फिर एक बड़े हादसे का सबब बनते-बनते बची। न्यू सोहना रोड पर नागरिक अस्पताल के ठीक सामने बिना किसी सुरक्षा दीवार के खुले मौत के कुएं नुमा नाले में एक स्कूटी सवार अचानक जा गिरा।
गनीमत यह रही कि इस दुर्घटना में पीड़ित को केवल गंभीर चोटें आईं, वरना कुछ महीने पहले हथीन मोड़ पर हुए उस खौफनाक हादसे की पुनरावृत्ति होने में देर नहीं लगती, जिसमें एक बेकसूर युवक अपनी जान गंवा चुका था।
सबसे शर्मनाक पहलू तो यह रहा कि चंद कदमों की दूरी पर खड़े खाकी के पहरेदारों ने घायल की मदद करने से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया।
सड़क पर मौत का पहरा, बाल-बाल बचे राजेंद्र
हाउसिंग बोर्ड निवासी राजेंद्र कुमार नागरिक अस्पताल में सीटी स्कैन कराने के लिए निकले थे। न्यू सोहना रोड चौक पर लगे भारी जाम के बीच उनकी स्कूटी नाले के बिल्कुल करीब से गुजर रही थी। तभी अचानक सामने से तेज गति से आए एक लापरवाह कार चालक ने वाहन मोड़ा।
उस वाहन की टक्कर से बचने के प्रयास में राजेंद्र का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया और वे अपनी स्कूटी समेत सीधे गहरे, बिना बैरिकेड वाले नाले में जा समाए। इस दर्दनाक हादसे में उनके घुटनों और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं।
संवेदनहीनता की इंतहा, हम सिर्फ ट्रैफिक संभालते हैं
हाउसिंग बोर्ड कालोनी निवासी राजेंद्र सिंह का गंभीर आरोप है कि नाले में गिरने के बाद जब उन्होंने अपनी जान बचाने और वाहन बाहर निकलवाने के लिए चौक पर मुस्तैद पुलिसकर्मियों से गुहार लगाई, तो उनका जवाब बेहद असंवेदनशील और निराशाजनक था।
पुलिसकर्मियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उनकी ड्यूटी केवल यातायात व्यवस्था संभालने की है, किसी राहत कार्य की नहीं। हालांकि, इसके बाद स्थानीय राहगीर खुद आगे आए और उन्होंने राजेंद्र तथा उनकी स्कूटी को नाले से बाहर निकाला।
प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी की फिराक में
दैनिक जागरण इन खुले और असुरक्षित नालों को लेकर लगातार समाचार प्रकाशित कर जिला प्रशासन का ध्यान खींचने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अधिकारी किसी बड़े हादसे के इंतजार में गहरी नींद में सोए हुए हैं।
जनता का आक्रोश फूट पड़ा है। स्थानीय लोग हाउसिंग बोर्ड कालोनी आरडब्ल्यूए के प्रधान महाबीर सिंघल, जन सेवा समिति के चेयरमैन मेघ श्याम शर्मा, नील कमल गुप्ता, हरकेश, सबरजीत सौरोत सहित अन्य पूछ रहे हैं कि प्रशासन को इन जानलेवा नालों पर चारदीवारी बनवाने के लिए आखिर और कितने कुलदीप की बलि लेनी पड़ेगी।
शहर के राष्ट्रीय राजमार्ग, रसूलपुर रोड, बीचों-बीच बह रहा भंगूरी रजवाहा, न्यू सोहना रोड, हथीन मोड़, ओल्ड सोहना रोड, न्यू कालोनी, बाली नगर, मोती कालोनी, पातली गेट और सेक्टर दो से गुजर रहे नालों पर सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।
जगह-जगह टूटी पुलिया और गायब सुरक्षा दीवार बड़े हादसों को खुला निमंत्रण दे रही हैं। इन नालों का स्वामित्व उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के पास है, जबकि देखरेख का जिम्मा नगर परिषद, पीडब्ल्यूडी और जन स्वास्थ्य विभाग का है। इसके बावजूद वर्षों से इन्हें ढकने या सुरक्षित करने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
अधिकारियों की बयानबाजी और टालमटोल
इस गंभीर मसले पर पलवल में तैनात उत्तर प्रदेश सरकार के कैनाल मैजिस्ट्रेट के रीडर विनोद कुमार का कहना है कि उनके विभाग के नालों का इस्तेमाल जन स्वास्थ्य विभाग व नगर परिषद कर रहा है। यदि नगर परिषद सुरक्षा दीवार के लिए प्रपोजल तैयार कर दे, तो निर्माण उत्तर प्रदेश विभाग द्वारा कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में जिला नगर आयुक्त से बातचीत हुई है। वहीं, दूसरी ओर जिला नगर आयुक्त मनीषा शर्मा का कहना है कि पहले उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग नगर परिषद को एनओसी दे, तभी बजट तैयार किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल आपातकालीन फंड से सुरक्षा दीवार बनवा दी जाएगी।
