एनक्वास निरीक्षण से पहले चमका पलवल अस्पताल, 50 लाख फंड की उम्मीद
पलवल का जिला नागरिक अस्पताल राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्वास) की केंद्रीय टीम के निरीक्षण से पहले चमक उठा है। ...और पढ़ें

एनक्वास निरीक्षण से पहले चमका पलवल अस्पताल, 50 लाख फंड की उम्मीद ( एआई जेनरेटेड इमेज )
HighLights
एनक्वास टीम के निरीक्षण से पहले पलवल अस्पताल में सुधार।
अस्पताल को राष्ट्रीय प्रशंसा पत्र और सालाना फंड की उम्मीद।
सफाई, व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में अधिकारी-कर्मचारी जुटे।
जागरण संवाददाता, पलवल। दवाइयों की किल्लत, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाला पलवल का जिला नागरिक अस्पताल इन दिनों चमक रहा है।
अस्पताल के शौचालयों से लेकर फर्श तक की सफाई हो रही है, इमरजेंसी वार्ड के स्ट्रेचर पर साफ चादरें बिछाई जा रही हैं और व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए अधिकारी दिन-रात जुटे हैं।
मरीजों को लंबे समय तक सुविधाओं का इंतजार क्यों करना पड़ा?
सवाल यह है कि मरीजों को लंबे समय से बेहतर सुविधाओं का इंतजार क्यों करना पड़ा और अब अचानक अस्पताल की सूरत बदलने की नौबत क्यों आ गई?
दरअसल, राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्वास) की केंद्रीय टीम के प्रस्तावित तीन दिवसीय निरीक्षण से पहले अस्पताल प्रशासन सक्रिय हो गया है। इस बार नजर केवल प्रशंसा पत्र पर नहीं, बल्कि हर साल मिलने वाले लाखों रुपये के फंड पर भी है।
राजस्थान के सीकर, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और गुजरात से आने वाले विशेषज्ञों की टीम अस्पताल के 16 प्रमुख विभागों का मूल्यांकन करेगी। निरीक्षण में बेहतर अंक हासिल करने के लिए अस्पताल प्रशासन ने सफाई से लेकर मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं तक को दुरुस्त करने की मुहिम छेड़ दी है।
हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन) के तहत तैनात 139 कर्मचारियों को सफाई और व्यवस्था सुधारने के काम में लगाया गया है। ओपीडी के शौचालयों की सफाई से लेकर परिसर के फर्श तक को चमकाया गया है। इमरजेंसी वार्ड में बिना चादरों के पड़े रहने वाले स्ट्रेचर पर भी अब साफ-सुथरी चादरें नजर आने लगी हैं।
निरीक्षण की आहट से अधिकारियों ने संभाली कमान
केंद्रीय टीम के निरीक्षण में कोई कमी सामने न आए, इसके लिए सिविल सर्जन डा. सतिंद्र वशिष्ठ, पीएमओ डा. संजय शर्मा, एसएमओ डा. सुरेश बुरोलिया और एनक्वास नोडल अधिकारी डा. दुष्यंत कुमार व डा. नरेश डागर ने खुद व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इमरजेंसी वार्ड, बेड व्यवस्था, लाइट, वेंटिलेशन और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की जांच की गई। कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि गुणवत्ता मानकों के पालन में कोई लापरवाही न हो।
16 विभागों की होगी परीक्षा
केंद्रीय टीम केवल साफ-सफाई और बाहरी चमक-दमक तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अस्पताल के 16 प्रमुख विभागों की व्यवस्थाओं का बारीकी से मूल्यांकन करेगी। इनमें आपातकालीन विभाग, ऑपरेशन थिएटर, प्रसव कक्ष, प्रसूति वार्ड, बाल रोग ओपीडी व वार्ड, एसएनसीयू, एनआरसी, ब्लड बैंक, पैथोलॉजी लैब, डायलिसिस सेंटर, फार्मेसी, ओपीडी, आईपीडी, सामान्य प्रशासन और स्वच्छता प्रबंधन सहित अन्य निर्धारित सेवाएं शामिल हैं।
प्रशंसा पत्र के साथ सालाना 50 लाख रुपये के फंड की उम्मीद
अस्पताल प्रशासन की इस तैयारी के पीछे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के साथ आर्थिक लाभ हासिल करने की उम्मीद भी है। पीएमओ डा. संजय शर्मा के अनुसार, एनक्वास के निर्धारित मानकों पर खरा उतरने पर अस्पताल को राष्ट्रीय स्तर का प्रशंसा पत्र मिलेगा।
इसके साथ अगले तीन वर्षों तक प्रति बेड सालाना 10 हजार रुपये का अनुदान मिलने का प्रावधान है। अन्य मदों को मिलाकर अस्पताल को हर साल करीब 50 लाख रुपये का बजट मिलने की उम्मीद है। इस राशि का इस्तेमाल आधुनिक चिकित्सा उपकरण खरीदने और अस्पताल के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने में किया जा सकेगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि केंद्रीय टीम के दौरे के लिए चमकाया गया अस्पताल निरीक्षण के बाद भी इसी तरह साफ-सुथरा और व्यवस्थित रहता है या फिर टीम के जाते ही व्यवस्थाएं पुराने ढर्रे पर लौट आती हैं। मरीजों को असल राहत तभी मिलेगी, जब सफाई के साथ दवाइयों की उपलब्धता और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं में भी लगातार सुधार दिखाई देगा।
