संजय मग्गू, पलवल

सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लाख दावे करे, लेकिन शहर के जिला स्तरीय नागरिक अस्पताल में अनियमितताएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। आए दिन अस्पताल में मरीजों को पेश आने वाली परेशानियां मूंह बांए खड़ी रहती हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों को शायद इससे कोई सरोकार ही नहीं है। मंगलवार को करीब तीन घंटे तक सात गर्भवती महिलाएं प्रसव पीड़ा के साथ भटकती रहीं। पहले तो भर्ती होने के लिए कार्ड बनने में ही एक घंटे से अधिक समय लग गया। जब भर्ती हो गईं तो डॉक्टर ने टेस्ट के लिए लैब में भेज दिया, लेकिन लेब संचालक महोदय अपनी सीट से नदारद मिले। पूछने पर उन्होंने टका सा जवाब दे दिया कि इंतजार कर लो, मैं तो शाम को पांच बजे तक आऊंगा।

गांव बाता निवासी रेणु दोपहर को करीब दो बजे प्रसव पीड़ा के चलते अपने परिजनों के साथ अस्पताल में पहुंची थीं। 15 मिनट के अंतराल में छह और गर्भवती महिलाएं अस्पताल में पहुंच गईं। भर्ती होने के लिए आपातकालीन वार्ड में कार्ड बनाने वाले बाबू का कमरा खाली पड़ा था। करीब एक घंटे के इंतजार के बाद बाबू ने आकर सभी महिलाओं के कार्ड बना दिए, लेकिन डॉक्टर की ताईद के बाद उन्हें रक्त की जांच कराने के लिए करीब तीन घंटे तक भटकना पड़ा।

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दो घंटे तक लैब के बाहर खड़ी रही। पहले पर्ची कटवाने में एक घंटे से अधिक समय लग गया। लैब पर कार्यरत अधिकारी को फोन कराया, तो उसने कह दिया कि पांच बजे से पहले नहीं आ सकता। अधिकारियों को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।

- कल्याणी, नागरिक अस्पताल में भर्ती महिला की परिचायिका

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अस्पताल में कोई सुनने वाला नहीं है। करीब एक माह पूर्व अपनी पत्नी को प्रसव के लिए लाया था, तब भी इसी प्रकार से परेशानी हुई थी। आज भाई की पत्नी को प्रसव के लिए लाया हूं, हालात जस के तस हैं। मेरे साथ पुष्पा, गंगा, राजकुमार, रमेशचंद, दीपक व आंचल जिनके कि परिवार की महिलाएं अस्पताल में भर्ती हैं ने भी शिकायत की है।

- दीपक, निवासी सैक्टर-2

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मुझे शिकायत मिली है, जिसमें कुछ लोगों ने आरोप लगाए हैं। जांच की जाएगी, जो भी कोई दोषी पाया गया उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

- डा. बीर ¨सह सहरावत, एसएमओ

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