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गन्ना किसानों के लिए ये कृषि यंत्र बना वरदान, विशेषज्ञों ने गिनाएं फायदे

Published: Wed, 21 Oct 2026 10:35 AM (IST)

गन्ने की खेती में मजदूरों की कमी और बढ़ती लागत को देखते हुए आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग समाधान बन रहा है।

गन्ने की खेती में मशीनीकरण ( एआई जेनरेटेड इमेज )

गन्ने की खेती में मशीनीकरण ( एआई जेनरेटेड इमेज )

HighLights

  1. आधुनिक यंत्रों से गन्ने की खेती में लागत घटेगी।

  2. मजदूरों पर निर्भरता कम होगी, उत्पादन बढ़ेगा।

  3. सरकार कृषि यंत्रों पर अनुदान भी प्रदान कर रही है।

जागरण संवाददाता, पलवल। गन्ने की खेती में मजदूरों की कमी और बढ़ती मजदूरी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में आधुनिक कृषि यंत्र गन्ना किसानों के लिए मददगार साबित हो सकते हैं।

इनकी सहायता से बिजाई से लेकर कटाई तक के कार्य कम समय और कम लागत में पूरे किए जा सकते हैं। इससे मजदूरों पर निर्भरता घटने के साथ उत्पादन और गुणवत्ता में भी सुधार की संभावना बढ़ेगी।

कृषि विशेषज्ञ डॉ. महावीर सिंह मलिक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के गन्ना अनुभाग की ओर से गांव सारोली में आयोजित किसान गोष्ठी में किसानों को संबोधित कर रहे थे।

सिर्फ चीनी तक सीमित नहीं गन्ना...

उन्होंने बताया कि गन्ना केवल चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि गुड़, खांडसारी, एथेनॉल, बिजली उत्पादन, रस, पशुचारे और ग्रामीण उद्योगों के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह नगदी फसल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाती है।

डॉ. मलिक ने कहा कि गन्ना श्रम प्रधान फसल है। इसकी बिजाई, निराई-गुड़ाई, खाद एवं दवा का प्रबंधन और कटाई जैसे कार्यों के लिए बड़ी संख्या में मजदूरों की जरूरत पड़ती है। मजदूरों की कमी और बढ़ती मजदूरी के कारण कई बार कृषि कार्य समय पर नहीं हो पाते, जिसका असर फसल के उत्पादन और गुणवत्ता पर पड़ता है। ऐसे में खेती में मशीनीकरण अपनाना समय की जरूरत है।

एक साथ हो सकते हैं कई काम

डॉ मलिक ने बताया कि कटर प्लांटर मशीन की मदद से केवल चार लोगों के सहयोग से चार घंटे में एक एकड़ में गन्ने की बिजाई की जा सकती है। ट्रैक्टर से चलने वाली इस मशीन से खेत में खूड बनाना, गन्ने के बीज को टुकड़ों में काटना, बिजाई करना तथा खाद और दवा डालने जैसे कई कार्य एक साथ किए जा सकते हैं।

उन्होंने बताया कि आरबीएस प्लांटर से गन्ने और गेहूं की बिजाई की जा सकती है। वहीं, रैटून मैनेजर और पावर ब्रीडर की सहायता से गन्ने के ठूंठ काटने, निराई-गुड़ाई करने और मिट्टी चढ़ाने जैसे कार्य आसानी से किए जा सकते हैं। चौड़ा खूड रेजर भी गन्ने की उचित दूरी पर बिजाई करने में उपयोगी है।

कम होगी श्रमिकों पर निर्भरता

डॉ मलिक ने कहा कि गन्ने की कटाई और छिलाई में सबसे अधिक श्रमिकों की आवश्यकता होती है। कंबाइन चॉपर हार्वेस्टर जैसी मशीनों के उपयोग से कटाई और छिलाई का कार्य आसान बनाया जा सकता है। इससे समय की बचत होगी और मजदूरों पर निर्भरता कम होगी।

उन्होंने बताया कि किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र अपनाने के लिए सरकार की ओर से अनुदान देने का भी प्रावधान है।

सहायक गन्ना अधिकारी अरुण सोलंकी ने किसानों को गन्ने में सिंचाई के उचित प्रबंधन और फसल को गिरने से बचाने के उपाय बताए।

किसानों को दी जाएगी आर्थिक सहायता

वहीं, चीनी मिल के गन्ना विकास अधिकारी बिजेंदर सिंह ने बताया कि मिल की ओर से बाहर से गन्ने का बीज खरीदने वाले किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सहायक गन्ना अधिकारी अरुण सोलंकी ने की, जबकि संचालन गन्ना विकास अधिकारी बिजेंदर सिंह और राजन ने किया।

इस अवसर पर गन्ना निरीक्षक प्रेमपाल और बिशन सिंह सहित किसान दरयाव, देशपाल, रामधन, रघुवीर, जयचंद्र, सौराज, उदय, सागर और ज्ञान आदि मौजूद रहे।

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