विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 10, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

दादा कान्हा के जीवन चरित्र से लेते हैं राष्ट्र रक्षा की प्रेरणा

By Edited By:
Published: Thu, 10 Mar 2016 04:25 PM (IST)

---------- सुरेंद्र चौहान, पलवल मुगल सम्राट औरंगजेब के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजाने वाले वीर

News Article Hero Image

----------

सुरेंद्र चौहान, पलवल

मुगल सम्राट औरंगजेब के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजाने वाले वीर कान्हा रावत का नाम आज भी इतिहास के सुनहरे पन्नों में अंकित है। ¨हदू हो मुस्लिम सभी संप्रदाय के लोग 1682 ईसवी में शहीद हुए दादा कान्हा रावत का नाम आज भी गर्व से लेते हैं और युवा उनके जीवन चरित्र से राष्ट्र रक्षा की प्रेरणा लेते हैं। उनके पैतृक गांव बहीन में स्थित कान्हा गोशाला में उनके शहीदी दिवस पर हर साल मेला लगता है। मेले में लोगों को धर्म, संस्कृति और राष्ट्र रक्षा के अलावा सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूक किया जाता है। इस बार यह मेला 12 व 13 मार्च को लगेगा।

कान्हा रावत का जन्म 1640 ईसवी में गांव बहीन में बीरबल व लीला देवी के घर में हुआ था। कान्हा के छोटे भाई का नाम दलशाह था। कान्हा रावत का विवाह अलवर रियासत के गांव छीका निवासी कपूरी देवी था। उनके दो पुत्र हुए थे। छोटे पुत्र रघुनाथ के जन्म के बाद कपूरी देवी का निधन हो गया। फिर उनका विवाह हथीन के ही घर्रोंट निवासी उदय ¨सह बड़गुर्जर की पुत्री तारावती से हुआ।

जजिया कर के बाद शुरू हुआ आंदोलन

मुगल सम्राट औरंगजेब ने 1679 ईसवी में ¨हदुओं पर जजिया कर लगा दिया और लोगों को जबरन मुसलमान बनाया जाने लगा। बहुत से लोगों ने औरंगजेब के प्रताड़ना से तंग आकर ¨हदू धर्म स्वीकार भी कर लिया। उस समय कान्हा रावत के नेतृत्व रावत पाल के पांच गांवों के लोगों ने महापंचायत की और जजिया कर के विरोध करने का निर्णय लिया। औरंगजेब को जब इस बात का पता चला तो उसने अब्दुल नबी को बहीन पर आक्रमण करने के लिए भेजा।

अब्दुल नबी ने फिरोजपुर झिरका में अपना पड़ाव डाला और अपने जासूसों द्वारा बहीन के बारे में जानकारी हासिल की। 1682 ईसवी में फाल्गुन माह में बहीन पर आक्रमण कर दिया। रावत पाल के नौजवानों ने कान्हा रावत के नेतृत्व में अब्दुल नबी की टुकड़ी से जमकर लोहा लिया और उनकी जीत लगभग होने ही वाली थी, तभी फिरोजपुर झिरका से एक और शाही टुकड़ी वहां पहुंच गई। इस लड़ाई में रावतों के करीब दो हजार नौजवान शहीद हो गए और दादा कान्हा को गिरफ्तार कर लिया गया था।

दी गई तरह-तरह की यातनाएं

दादा कान्हा को दिल्ली में अजमेरी गेट के पास कैद करके रखा गया और उन्हें तरह-तरह की यातनाएं दी गई। समाचार सुनकर उनका छोटा भाई दलशाह दिल्ली गया, उसने देखा की कान्हा को आधा मिट्टी में गाड़ा हुआ था और कोड़ों से मारा जा रहा था। दादा कान्हा का शरीर लहुलुहान हो चुका था, परंतु उन्होंने औरंगजेब के सामने झुकने से इंकार कर दिया। दादा कान्हा ने दलशाह से वापस लौट जाने के लिए कहा और कहा कि उनकी आत्मा को तभी शांति मिलेगी, जब रावत अब्दुल नबी को मौत के घाट उतार देंगे।

दलशाह ने वापस लौटकर नौजवानों को दादा कान्हा का संदेश सुनाया, जिस पर नौजवानों ने अब्दुल नबी को पलवल के पास घेर लिया और मौत के घाट उतार दिया। अब्दुल नबी की मौत की खबर सुनकर औरंगजेब ने 1682 ईसवी में चैत्र की अमावस्या को दादा कान्हा को ¨जदा जमीन में गड़वा दिया।

-----

दादा कान्हा का जीवन धर्म और संस्कृति के रक्षा के लिए प्रेरित करता है, इसलिए हर साल शहीदी दिवस पर सम्मेलन का आयोजन किया जाता है, ताकि युवा उनके जीवन चरित्र से प्रेरणा ले सकें।

-हरेराम, निवासी गांव पहाड़ी।

-----

दादा कान्हा ने रावत पाल के नौजवानों को राष्ट्र रक्षा के लिए प्रेरित किया था। आज भी रावत पाल के युवा दादा कान्हा रावत जीवन चरित्र को पढ़कर प्रेरणा लेकर समाज कल्याण के कार्य कर रहे हैं।

-नंदन ¨सह, निवासी नांगल जाट।

-----

औरंगजेब ने उस समय बहुत से ¨हदुओं को प्रताड़ित कर मुस्लिम बना दिया था। क्षेत्र के ज्यादातर मुस्लिम परिवार उस समय के प्रताड़ित ¨हदू परिवार ही हैं। इसलिए सभी दादा कान्हा रावत को याद करते हैं।

-बिरजा ¨सह, निवासी गांव बहीन।

-----

दादा कान्हा के जीवन चरित्र से प्रेरित होकर बहुत से युवा भारतीय सेना में भर्ती होकर राष्ट्र रक्षा में अपना योगदान देते हैं। वर्तमान में भी बहुत से युवा भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए तैयारी कर रहे हैं।

-भगवत रावत, निवासी गांव बहीन।

-----

जिस तरह से वर्तमान में युवा नशाखोरी व अन्य बुराइयों की तरफ बढ़ रहे हैं, दादा कान्हा जैसे वीरों की कहानियां उन्हें सुनहरे अतीत के बारे में बताकर अच्छे रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करती है।

-श्याम ¨सह रावत, गांव सरपंच।

-----------

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।