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उबर टैक्सी चलाने वाले सलमान खान ने जापान में रचा इतिहास, भारत को दिलाया मेडल; पूरे हरियाणा में छाया

Published: Fri, 25 Sep 2026 08:18 PM (IST)

उबर टैक्सी चलाकर परिवार का सहारा बनने वाले सलमान खान ने जापान में 20वें एशियन गेम्स 2026 में रोइंग की ...और पढ़ें

उबर टैक्सी चलाने वाला सलमान अब एशियन गेम्स में चमका। जागरण

उबर टैक्सी चलाने वाला सलमान अब एशियन गेम्स में चमका। जागरण

HighLights

  1. सलमान खान ने एशियन गेम्स में रोइंग कांस्य पदक जीता।

  2. तावड़ू के उबर चालक से अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बने सलमान।

  3. सेना में भर्ती होकर रोइंग में देश का नाम रोशन किया।

संवाद सहयोगी, तावड़ू (मेवात)। कभी तावडू की सड़कों पर उबर टैक्सी चलाकर परिवार का सहारा बनने वाला सलमान खान आज अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर भारत का नाम रोशन कर रहा है।

जापान में आयोजित 20वें एशियन गेम्स 2026 में रोइंग की मेंस डबल स्कल्स स्पर्धा में सलमान खान ने साथी खिलाड़ी सतनाम सिंह के साथ कांस्य पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। उनकी इस उपलब्धि से तावडू समेत पूरे मेवात और उत्तर प्रदेश के अमेठी में खुशी का माहौल है।

चीन में स्वर्ण और उज्बेकिस्तान में रजत पदक जीता

सलमान और सतनाम ने अपनी रेस करीब छह मिनट 13 सेकंड में पूरी करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। स्पर्धा में चीन में स्वर्ण और उज्बेकिस्तान में रजत पदक जीता।

भारत की जोड़ी को चीन, उज्बेकिस्तान,ईरान और जापान समेत छह देशों के खिलाड़ियों से कड़ी चुनौती मिली। इसके बावजूद दोनों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया।

तावड़ू में बीता बचपन, यहीं से शुरू हुआ संघर्ष

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमेठी निवासी सलमान का परिवार लंबे समय तक तावडू में रहा और उनका बचपन भी यहीं बीता। आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने तावड़ू में उबर टैक्सी चलाकर अपने जीवन की शुरुआत की। उनकी लंबी कद-काठी देखकर दोस्तों ने उन्हें सेना में भर्ती होने की सलाह दी।

सलमान ने ओपन भर्ती के जरिए सेना में प्रवेश किया। सेना में स्पोर्ट्स कोटे के दौरान कोच की नजर उनकी प्रतिभा पर पड़ी और उन्हें रोइंग के लिए चुना गया।

दिलचस्प बात यह है कि सलमान को शुरुआत में रोइंग का कोई अनुभव नहीं था। कोचों के मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत से उन्होंने इस खेल की बारीकियां सीखीं और राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई।

एक समय उन्होंने रोइंग छोड़ भी दी थी, लेकिन कोचों ने उन पर भरोसा बनाए रखा और दोबारा अभ्यास के लिए प्रेरित किया। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और एशियन गेम्स में देश के लिए पदक जीतने का सपना साकार हुआ।

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