शेर सिंह चांदोलिया, नगीना

रक्षाबंधन का त्योहार बाद में पहले रखेंगे मरीजों का ख्याल, यह कहना है जिले के सिविल सर्जन डॉ. जसवंत सिंह पुनिया का। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमितों की जांच और इलाज के लिए डॉक्टर सोमवार को त्योहार पर भी अस्पताल में मौजूद रहेंगे।

डॉक्टरों को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है। यही मानना है मेवात के कोरोना विजेताओं का। जब संक्रमित मरीजों को आइसोलेट किया गया था तो डॉक्टरों ने उनका इलाज करने के साथ-साथ उन्हें अन्य कोई परेशानी ना हो, इसका भी पूरा खयाल रखा था। कोरोना विजेताओं का कहना है कि जो मरीज अस्पतालों में भर्ती थे, उनका तो बेहतर इलाज व देखभाल डॉक्टर ने की ही, साथ में घर पर उपचार ले रहे लोगों का भी हर समय पूरा ध्यान रखा गया और बेहतर उपचार दिया गया। इसका परिणाम सबके सामने है कि सैकड़ों लोग ठीक होकर घर पहुंच गए हैं। रक्षाबंधन पर भी नहीं संक्रमितों से मिलने की इजाजत

जिन लोगों को अस्पताल में क्वारंटाइन कर रखा है, वह लोग किसी भी हालत में रक्षाबंधन का त्योहार नहीं मना सकेंगे और ना ही उनके परिजन उनसे मिल पाएंगे। यहां तक की जो लोग घर में उपचार ले रहे हैं, उन लोगों ने भी अपने परिजनों से दूरी बनाकर रखी है, क्योंकि सबसे पहले स्वास्थ्य है, इसके बाद तीज-त्योहार हैं। कोरोना संक्रमितों के साथ साथ डॉक्टर भी अस्पतालों में ही रह रहे हैं। किसी को भी त्योहार की छुट्टी नहीं मिली है। सबसे पहले हमें लोगों के स्वास्थ्य का ख्याल रखना है। त्योहार तो हम बाद में भी मना सकते हैं। इसलिए हम हर समय अपनी ड्यूटी कर रहे हैं, ताकि किसी भी बीमार व्यक्ति को परेशानी ना हो सके।

डॉ. अरविद सिंह, उपसिविल सर्जन व जिला नोडल अधिकारी कोरोना एक डॉक्टर के लिए सबसे पहले मरीज का स्वास्थ्य होता है। त्योहार को त्यागा जा सकता है, लेकिन मरीजों को नहीं। इसलिए त्योहार बाद में है, सबसे पहले जनता के स्वास्थ्य का ख्याल रखना हमारा कर्तव्य है। इसलिए इस बार हम मरीजों के साथ रहेंगे और उनका ख्याल रखेंगे। कोरोना जड़ से खत्म हो जाए, हमारे लिए यही सबसे बड़ा त्योहार है।

डॉ. जसवंत सिंह पुनिया, सिविल सर्जन

Posted By: Jagran

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