नूंह में दौड़ेगी हाई-स्पीड ट्रेन, टनल के लिए ब्लास्टिंग को मिली मंजूरी; हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर को रफ्तार
नूंह में हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर परियोजना के तहत भूमिगत रेल कार्य के लिए नियंत्रित ब्लास्टिंग की अस्थायी अनुमति 31 दिसंबर 2026 तक मिली है।

नूंह में ऑर्बिटल रेल का भूमिगत रेल कॉरिडोर बनेगा। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
नूंह में भूमिगत रेल कार्य के लिए ब्लास्टिंग की अनुमति
31 दिसंबर 2026 तक अस्थायी अनुमति, सुरक्षा मानक अनिवार्य
5618 करोड़ की परियोजना में 1075 करोड़ सुरंग पर
शिशपाल सहरावत,नूंह। हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर (एचओआरसी) परियोजना के निर्माण कार्य को गति देने के लिए जिला प्रशासन ने अहम कदम उठाया है।
जिला मजिस्ट्रेट नूंह अखिल पिलानी ने परियोजना के पैकेज-सी-4 के तहत पाटुका पट्टी के गांव सेहसोला क्षेत्र में भूमिगत रेल कार्य के लिए नियंत्रित ब्लास्टिंग की अस्थायी अनुमति प्रदान की है। यह अनुमति 31 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी।
प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार चेनज 25 940 से 25 698 तथा 25 960 से 25 712 के बीच भूमिगत खुदाई के लिए नियंत्रित ब्लास्टिंग की जाएगी।
ब्लास्टिंग कार्य 24 घंटे संचालित करने की अनुमति दी गई है, हालांकि रात के समय विस्फोटक संचालन के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा। पर्याप्त रोशनी और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित होने के बाद ही रात्रिकालीन कार्य किया जा सकेगा।
ब्लास्टिंग के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने सभी कर्मचारियों को हेलमेट सहित आवश्यक सुरक्षा उपकरण और सुरक्षात्मक पोशाक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
ब्लास्टिंग केवल अधिकृत एजेंसी और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की निगरानी में ही की जाएगी। पुलिस विभाग तथा संबंधित अधिकारी समय-समय पर कार्यस्थल का निरीक्षण और निगरानी करेंगे।
कंपनी को विस्फोटक सामग्री से संबंधित सभी कानूनों व नियमों के साथ सरकार द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। कार्य केवल स्वीकृत राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) क्षेत्र में किया जाएगा।
इसके अलावा वन संरक्षण और पर्यावरण संबंधी प्रावधानों का पालन भी अनिवार्य होगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ब्लास्टिंग के कारण वन्यजीव,वनस्पति और जैव विविधता को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए।
ब्लास्टिंग शुरू करने से पहले कंपनी को सहायक खनन अभियंता कार्यालय से आवश्यक अल्पकालिक खनन अनुमति तथा विस्फोटक सामग्री के भंडारण और उपयोग के लिए उप मुख्य नियंत्रक विस्फोटक,फरीदाबाद से जरूरी स्वीकृतियां प्राप्त करनी होंगी। शर्तों या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन मिलने पर अनुमति तत्काल रद्द की जा सकती है।
1075 करोड़ टनल पर होंगे खर्च
वर्ष 2017 में करीब 5618 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुई लगभग 134 किलोमीटर लंबी एचओआरसी परियोजना में 4.7 किलोमीटर लंबी डबल ट्रैक टनल का निर्माण किया जाना है।
पूरी परियोजना की लागत का करीब पांचवां हिस्सा यानी लगभग 1075 करोड़ रुपये टनल निर्माण पर खर्च होने का अनुमान है। टनल में प्रत्येक दो किलोमीटर पर वेंटिलेशन की व्यवस्था होगी।
अत्याधुनिक सिस्टम के तहत ट्रेन के टनल में प्रवेश करते ही आटोमेटिक फोर्स वेंटिलेशन मशीन सक्रिय होकर बाहर की हवा को अंदर पहुंचाएगी। टनल की गहराई करीब 67 मीटर तक रखी गई है।
160 की रफ्तार से दौड़ेंगी यात्री ट्रेनें
करीब 127 किलोमीटर के ट्रैक पर कुल 17 स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिनमें 14 नए और तीन पुराने स्टेशन शामिल हैं। नूंह जिले के तावड़ू क्षेत्र के गांव धुलावट में भी स्टेशन प्रस्तावित है।
परियोजना के पूरा होने के बाद पलवल से चंडीगढ़ की यात्रा करीब ढाई से तीन घंटे में पूरी होने की उम्मीद है। यात्री ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटा,जबकि मालगाड़ियों की गति 100 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है।
