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नारनौल के छोटे से गांव से जापान में एशियन गेम्स तक पहुंची सान्या, मां को बेटी के सपने के लिए छोड़ना पड़ा घर

Published: Thu, 24 Sep 2026 05:45 PM (IST)

नारनौल की सान्या यादव ने डिस्कस थ्रो में जापान में होने वाले एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई कर लिया है। ...और पढ़ें

गांव बैरावास की बेटी सान्या यादव अब जापान में हो रहे एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।

गांव बैरावास की बेटी सान्या यादव अब जापान में हो रहे एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।

HighLights

  1. सान्या यादव ने डिस्कस थ्रो में जापान एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई किया।

  2. मां कृष्णा यादव ने बेटी के खेल करियर के लिए घर छोड़ा।

  3. सान्या ने 65वीं नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था।

जागरण संवाददाता, नारनौल। पिता की ड्यूटी शहर-दर-शहर बदलती रही, लेकिन बेटी के सपनों का मैदान नहीं बदला। एयरफोर्स में तैनात महेंद्र सिंह की ड्यूटी मध्यप्रदेश में है तो उनकी बेटी सान्या यादव के खेल करियर की जिम्मेदारी मां कृष्णा यादव ने देहरादून में संभाल ली।

बेटी के साथ रहकर मां उसकी ट्रेनिंग और रोजमर्रा की जरूरतों का ध्यान रखती रहीं और बेटी ने भी मेहनत का ऐसा जवाब दिया कि अब वह जापान में होने वाले एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही है।

56.06 मीटर की दूरी तक चक्का फेंका

गांव बैरावास की यह बेटी 28 सितंबर को जापान के आईची-नगोया में आयोजित एशियन गेम्स में भारतीय दल की तरफ से डिस्कस थ्रो में अपना जलवा बिखेरेंगी।

सान्या ने ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित 65वीं नेशनल इंटर स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 56.06 मीटर की दूरी तक चक्का फेंककर रजत पदक जीता था।

लगातार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के दम पर उन्होंने एशियन गेम्स के लिए अपनी जगह बनाई। अब राष्ट्रीय मंच पर पदक जीतने के बाद सान्या के सामने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने की चुनौती है।

भिवानी की सीमा और रोहतक की निधि रानी भी जा रहीं

सान्या ने जयपुर सहित विभिन्न स्थानों पर आयोजित राष्ट्रीय स्तर की एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में डिस्कस थ्रो में हिस्सा लिया और अपने प्रदर्शन में लगातार सुधार किया। भुवनेश्वर में 56.06 मीटर का प्रदर्शन उनके लिए अहम पड़ाव साबित हुआ। वर्ल्ड एथलेटिक्स की प्रोफाइल में भी उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 56.05 मीटर दर्ज है।

राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार मजबूत प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय एथलेटिक्स टीम तक पहुंचाया। एशियन गेम्स के लिए सान्या के साथ भिवानी की सीमा और रोहतक की निधि रानी ने भी क्वालीफाई किया है। अब तीनों भारतीय एथलेटिक्स दल का हिस्सा हैं।

पिता की ड्यूटी, मां ने संभाली बेटी की ट्रेनिंग

सान्या की सफलता के पीछे मैदान पर उनकी मेहनत के साथ परिवार का त्याग भी जुड़ा है। पिता महेंद्र सिंह एयरफोर्स में सेवारत हैं। पहले उनकी पोस्टिंग पटियाला में रही, जहां परिवार उनके साथ रहा। वर्तमान में उनकी ड्यूटी मध्यप्रदेश में है। बेटी के खेल करियर को आगे बढ़ाने के लिए मां कृष्णा यादव देहरादून में उसके साथ रहीं।

सान्या ने ओएनजीसी देहरादून में कोच जगजीत सिंह के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया। मां ने ट्रेनिंग से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों तक बेटी का साथ निभाया। सान्या की छोटी बहन तनीषा भी खेल को अपना करियर बनाने की राह पर है।

वह पटियाला में रहकर बैडमिंटन का प्रशिक्षण ले रही है। यानी एक ही परिवार की दो बेटियां दो अलग-अलग खेलों में अपना भविष्य तलाश रही हैं।

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