नारनौल: 2 करोड़ रुपये के बिलों पर विवाद, अधिकारियों ने हस्ताक्षर से किया इनकार; आखिर क्या है मामला?
नारनौल में जिला परिषद के 20 विकास कार्यों के लगभग दो करोड़ रुपये के बिलों पर विवाद खड़ा हो गया ...और पढ़ें
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जेई और एसडीओ की जिम्मेदारी निर्धारित की। जागरण
HighLights
नारनौल में जिला परिषद के 2 करोड़ के बिलों पर विवाद।
एक्सईएन ने बिलों पर हस्ताक्षर करने से किया स्पष्ट इनकार।
सीईओ ने जेई और एसडीओ की जिम्मेदारी तय की।
जागरण संवाददाता, नारनौल। नारनौल में जिलापरिषद द्वारा करवाए गए 20 विकास कार्यों के करीब दो करोड़ रुपये के बिलों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जिला परिषद के निवर्तमान एक्सईएन ने जहां इन बिलों पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है, वहीं नए एक्सईएन भी हस्ताक्षर करने को तैयार नहीं हैं।
शुक्रवार को जिला परिषद के मीटिंग हॉल में आयोजित बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। इस दौरान सीईओ निर्मल नागर ने स्पष्ट कर दिया कि जिस अधिकारी की उपस्थिति में कार्य नहीं हुए, वह उन बिलों पर कैसे हस्ताक्षर कर सकता है। जिनकी मौजूदगी में कार्य करवाए गए हैं, उन पर हस्ताक्षर करवाने की जिम्मेदारी संबंधित जेई और एसडीओ की है।
उन्होंने साफ कहा कि यदि कार्य सही हैं तो पुराने एक्सईएन हस्ताक्षर करेंगे और यह जेई और एसडीओ की जिम्मेदारी, नहीं तो कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
उन्होंने कहा कि नियमों के विरुद्ध कोई भी कार्य नहीं किया जाएगा । बैठक की अध्यक्षता जिला परिषद प्रमुख राकेश कुमार ने की। उन्होंने सीईओ के सामने बिलों और एचईडब्ल्यू (हरियाणा इंजीनियरिंग वर्क्स)पोर्टल में कार्यों के कोड अपलोड नहीं होने की जानकारी दी।
बैठक में मौजूद जेई और एसडीओ ने भी कहा कि पोर्टल पर जेडपीओ(जिला परिषद आफिस) कोड नहीं दर्शा रहा है। सीईओ ने निर्देश दिए कि इस संबंध में लिखकर भेजें, ताकि मुख्यालय को अवगत करवाया जा सके। हालांकि इसी दौरान बताया गया कि पोर्टल पर 48 विकास कार्य अपलोड हो चुके हैं।
ऐसे में सवाल यह उठा कि यदि यह परेशानी थी तो ये कार्य कैसे अपलोड हो गए। यह समस्या कोई नई तो है नहीं और पिछले तीन साल से अधिकारी चुप क्यों बैठे हुए थे।
पार्षद ने पूछा-क्या प्राइवेट स्कूल
हरियाणा स्टाफ सेलेक्शन के पूर्व सदस्य वार्ड पांच के पार्षद देवेंद्र यादव ने बैठक में मौजूद शिक्षा अधिकारियों से सवाल किया कि इन दिनों प्राइवेट स्कूल छुट्टी वाले दिन भी बच्चों की आनलाइन कक्षाएं चलाते हैं। क्या यह नियमानुसार है या नहीं।
इस पर संबंधित अधिकारी ने एक बार तो इसे नियमानुसार बताया, लेकिन जब पार्षद ने इसे बैठक के मिनिट्स में चढ़ाने के लिए कहा तो अधिकारी ने कहा कि यह निमानुसार नहीं है और इस बारे में स्कूलों को पत्र लिखेंगे।
पार्षद संतोष पीटीआई ने अधिकारियों के स्थानांतरण होने पर हस्ताक्षर न होने के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि अधिकारियों के स्थानांतरण हो जाते हैं तो क्या काम नहीं होंगे।
उन्होंने हरियाणवी भाषा में उदाहरण दिया कि एक अंधे का दीवार के साथ लगते हुए दीवार खोज रहा था। जैसे ही उसके पास दरवाजा आया तो खुजली हो गई और वह दरवाजे से आगे निकल गया। हमारे साथ भी वैसा ही हो रहा है। अधिकारी स्थानांतरण हो जाते हैं तो पहले वाले हस्ताक्षर इसलिए नहीं करते,क्योंकि उनका स्थानांतरण हो गया और आने वाले इसलिए नहीं करते, क्योंकि वे तो अभी आए हैं।
अवैध कटों का मुद्दा उठाया
पार्षद संतोष पीटीआई ने सड़कों पर बने अवैध कटों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पिछली बैठकों में अवैध कटों को बंद करने का मुद्दा उठाया गया था। कट बंद तो किए नहीं गए पर उन पर लठ (लाठियां) लगाकर आवागमन रोका गया है। इससे तो हादसा हर हाल में होगा और लोग मरेंगे। पीडब्ल्यूडी बीएंडआर विभाग को इस पर कार्य करना चाहिए।
बैठक में नहीं पहुंचे चार विभागों के अधिकारी
जिला परिषद की बैठक में शुक्रवार को कार्यकारी अभियंता पीडब्ल्यूडी बीएंडआर विभाग,कार्यकारी अभियंता दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम, डीआईपीआरओ व निजामपुर बीडीपीओ नहीं पहुंचे।
सीईओ निर्मल नागर ने कहा कि संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और अगली बैठक में आना सुनिश्चित किया जाएगा।
बैठक के दौरान बिजली गुल
जिला परिषद की करीब दो घंटे बैठक चली। इस दौरान केवल एक तरफ के पंखे ही चले। एसी खराब था तो दूसरी साइड के पंखे चल ही नहीं रहे थे। इस बीच बिजली भी गुल हो गई। पंखे नहीं चलने की वजह से अधिकारियों व कर्मचारी पसीने से तर-बतर दिखाई दिए।
