सुनील कुमार, नारनौल :

रवींद्र फौजी हनीट्रैप प्रकरण में पुलिस की जांच में सामने आया है कि मुहम्मद इरफान कुरैशी के साथ देश के कुछ गद्दार भी शामिल हैं। यह वही कुरैशी है, जिसके फोन से विदेशी महिला एजेंट रवींद्र फौजी से संपर्क बनाए हुए थी। पुलिस के हाथ इस मामले में कुछ और अहम सुराग भी लगे हैं। पुलिस को दिल्ली स्थित अजीमा होटल से मुहम्मद इरफान कुरैशी का वीजा हाथ लगा है। पुलिस अधिकारियों की मानें तो वीजा में अलग नंबर है। होटल में जहां पर रुका था, वहां पर अलग एवं अजमेर दरगाह में भी अलग ही फोन नंबर दिए गए हैं। इसमें सबसे बड़ी गौर करने लायक बात तो यह है कि ये नंबर भारत के ही हैं।

इस जांच में देश के कुछ लोगों के नाम भी सामने आए हैं। जो कुरैशी के गुर्गे बनकर कार्य कर रहे हैं। कॉल रिकार्ड मिलते ही पुलिस को अगर सही पता मिला तो इन लोगों की भी गिरफ्तारी हो सकती है। मुहम्मद इरफान कुरैशी के वर्ष 2018 की कॉल रिकार्ड में यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि इसके संपर्क में अन्य लोग भी हैं। पुलिस को वर्ष 2018 की सात अक्टूबर की कॉल डिटेल रिकार्ड (सीडीआर) में तीन संदिग्ध नंबर सामने आए हैं। नंबरों की लोकेशन दिल्ली की आ रही है। पुलिस अब तीनों नंबरों की आइडी के माध्यम से पता लगाने में जुटी है कि आखिर ये नंबर किस के हैं व कितने दिनों से कुरैशी के साथ जुड़े हुए हैं। पुलिस ने इन नंबरों की भी कॉल रिकार्ड व वाट्सएप रिकार्ड खंगालना शुरू कर दिया है। मुहम्मद इरफान कुरैशी महिलाओं के जरिए भारतीय सेना के जवानों को फांसने में वर्ष 2016 से ही अपना जाल बिछा रहा था। फोन नंबर तो कुरैशी मैले कपड़ों की तरह बदलता था। पुलिस की जैसे ही जांच आगे बढ़ रही है तो उससे जुड़े काले कारनामे सामने आ रहे हैं। पुलिस अधिकारियों की मानें तो देश के अन्य युवक व युवतियां इसमें शामिल होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। सीडीआर में मिले नंबर दिल्ली में थे चालू

पुलिस ने जब रवींद्र फौजी के फोन पर आए वाट्सएप नंबरों की सीडीआर निकलवाई तो नंबर की लोकेशन सात अक्टूबर 2018 तक दिल्ली में आई। इसके बाद नंबर की लोकेशन का कुछ नहीं पता है। इस नंबर की लोकेशन अब भी कहां है, इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं मिल पा रही है। पुलिस अधिकारियों की मानें तो वर्ष 2018 से इसने वाट्सएप कॉल करनी शुरू कर दी। वर्ष 2018 में भी इस नंबर से चुनिदा नंबरों पर कॉल की गई है, जिसमें तीन नंबरों पर अधिक कॉल हुई, जो कि संदिग्ध दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इन नंबरों की छानबीन भी पुलिस ने शुरू कर दी है। जो आइडी मिली वहां का पता फेक :

पुलिस की माने तो जो आइडी पुलिस को मिल रही है वह फेक ही है। पुलिस को जिन दो नंबरों की संजय गांधी कैंप की आइडी मिली थी उनकी तलाश में जब छापेमारी की तो वहां पर इस तरह का कोई व्यक्ति व पता नहीं मिला। पुलिस अब सिम कार्ड जारी करने वाले डिस्ट्रीब्यूटर को हिरासत में लेकर पूछताछ करेगी।

Posted By: Jagran

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