जागरण संवाददाता, नारनौल: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत जिला में सौ एकड़ पंचायती भूमि पर बागवानी की जाएगी। इस पर खर्च होने वाले रुपये सरकार वहन करेगी। सभी बीडीपीओ को अपने-अपने खंड में कम से कम 10-10 एकड़ पंचायत भूमि की पहचान करनी होंगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जहां रोजगार के अवसर मिलेंगे वहीं पर्यावरण भी शुद्ध होगा। उपायुक्त आरके सिंह की अध्यक्षता में इस संबंध में लघु सचिवालय में समीक्षा बैठक आयोजित हुई।

उपायुक्त ने बताया कि जिला के नांगल चौधरी खंड के गांव श्योरामनाथपुरा की पांच एकड़ पंचायती भूमि की पहचान कर ली गई है। इस काम में तकनीकी पहलुओं को उद्यान विभाग देखेगा। इसके अलावा कोविड-19 के इस दौर में अधिक से अधिक रोजगार पैदा करने का यही एकमात्र तरीका है। उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत 309 रुपये दैनिक मजदूरी दी जाती है। यह देश में सबसे अधिक है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशानुसार 261 प्रकार के काम करवाए जा सकते हैं। जिला में वर्ष 2020-21 में 3.70 लाख मानव सर्जन करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से अब तक 1.40 लाख मानव सर्जन पूरे किए जा चुके हैं। कार्य के दौरान संबंधित विभाग यह भी सुनिश्चित करेगा कि कोविड-19 के संबंध में केंद्र व राज्य सरकार द्वारा दी गई सभी गाइडलाइन की पालना हो। उपायुक्त ने कहा कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि ग्रामीण विकास विभाग इस पर विशेष फोकस करे। इसमें सभी लाइन विभाग अपने लक्ष्यों को पूरा करेंगे।

उन्होंने कहा कि वन विभाग, सिचाई विभाग, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड, जन स्वास्थ्य विभाग तथा उद्यान विभाग के अधिक से अधिक काम हो सकते हैं। इसके लिए सभी विभाग एक-एक नोडल अधिकारी इस काम के लिए लगाएं। सभी विभाग अपने विभागीय कार्यों में मजदूरी का कार्य मनरेगा से करवाने का प्रस्ताव भिजवाएं। इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. मुनीश नागपाल, जिला परिषद से सीईओ लक्ष्मीनारायण, सिचाई विभाग से एसई सुरेश कुमार, जिला उद्योग अधिकारी मनदीप यादव, बीडीपीओ धर्मवीर, डीआरडीए से गोबिदराम शर्मा व अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

Posted By: Jagran

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