एक दिन का कृषि मेला ढाई घंटे में निपटा दिया, किसानों को टेंट उतारते मिले श्रमिक; अधिकारियों पर फूटा गुस्सा
कनीना में आयोजित जिला स्तरीय कृषि मेला मात्र ढाई घंटे में समाप्त कर दिया गया, जिससे किसानों में भारी रोष ...और पढ़ें

किसानों के आने से पहले ही उतर गया टेंट। फोटो: जागरण
HighLights
कनीना में जिला स्तरीय कृषि मेला ढाई घंटे में समाप्त
किसानों ने प्रचार की कमी और बजट दुरुपयोग का आरोप लगाया
अधिकारियों ने मुख्य अतिथि के समय की कमी बताई
जागरण संवाददाता, कनीना। कनीना के फुटबाल मैदान में सोमवार को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत जिला स्तरीय कृषि मेले का आयोजन किया गया, लेकिन दिलचस्प बात है कि कृषि विभाग के अधिकारियों ने इस मेले को मात्र ढाई घंटे में निपटा दिया।
जिसके पीछे कृषि अधिकारी मुख्य अतिथि जिला पार्षद प्रमुख डाॅ. राकेश कुमार के पास समय की कमी होने की दलील दे रहे हैं। इस बात का पटाक्षेप तब हुआ जब विभिन्न गांवों से किसान दोपहर के समय मेले में हिस्सा लेने आए। क्षेत्र के उन्नत एवं जागरूक किसानों ने मेले का रुख किया तो कर्मचारी टेंट उतरते नजर आए।
यह टेंट भी नजदीक से नहीं बल्कि नारनौल से लाया गया था। किसानों ने कहा कि कृषि विभाग के अधिकारियों ने एक दिवसीय मेले के नाम पर केवल मात्र ढाई घंटे में औपचारिकता पूरी की है। टेंट कर्मियों ने बताया कि मेले में दो-तीन सो व्यक्तियों ने हिस्सा लिया है।
मेले का प्रचार न करने आरोप
किसानों का मानना है कि कृषि विभाग के अधिकारियों की ओर से मेला आयोजन को लेकर व्यापक स्तर पर प्रचार नहीं किया गया। जानकारी के अभाव में क्षेत्र के बहुत से किसान मेले से वंचित रह गए जबकि कुछ किसानों को खबर मिलने पर आए तो एक दिवसीय मेले का समापन भी हो चुका था।
कृषि विभाग के अधिकारियों की मनमर्जी की भेंट चढे़ मेले को लेकर किसानों में रोष पैदा हो गया है। किसानों का आरोप है कि कृषि विभाग के अधिकारियों ने आनन-फानन में मेले का आयोजन कर किसानों को जागरूक करने के लिए आयोजित किए जाने वाले मेले के बजट को खुर्द-बुर्द कर दिया।
अधिकारी बोले- शाम पांच बजे तक का समय जरूरी रही
जिसे लेकर कृषि अधिकारियों की लापरवाही साफ झलक रही है। इस बारे में कृषि विभाग के उपमंडल अधिकारी डाॅ. अजय यादव ने बताया कि कनीना में मोटे अनाज को लेकर जिला स्तरीय कृषि मेला लगाया गया था। जिसमें 25 स्टाॅल लगाई गई थी।
इसके अलावा कृषि उपकरणों की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। उन्होंने कहा कि होली के त्योहार पर भीड़ डट नहीं पाई। इसलिए सुबह दस बजे से डेढ़ बजे तक मेले का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि सुबह दस से पांच बजे तक मेले का समय जरूरी नहीं है।
