जागरण संवाददाता, नारनौल: सचेत नागरिक मंच नारनौल ने शहर में जलभराव की समस्या पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जलभराव की समस्या के लिए शहर की जनता को जिम्मेदार ठहराना सरासर गलत है। अगर कहीं नालियों पर कब्जा है तो इसके लिए प्रशासन अकर्मण्यता भी जिम्मेदार है। मंच के संरक्षक दिलीप सिंह एडवोकेट ने आरोप लगाया कि जलभराव की समस्या का मुख्य कारण नगर परिषद नारनौल द्वारा शहर में गलत तरीके से बनाई गई सड़के हैं। सड़क बनाते समय पानी के बहाव व सड़कों के लेवल को बिल्कुल ध्यान में नहीं रखा गया। इस तरह पानी का बहाव है, उस तरफ सड़कों को ऊंचा कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि जलभराव की समस्या और गहरी हो गई। नालियां या तो बनाई ही नहीं गई यदि बनाई गई है तो बिना लेवल के बनाई गई है।

अभी तक नालों की सफाई का कार्य भी पूरा नहीं हुआ है। नगर परिषद जो भी सड़क बनाती है, उसको पुराने लेवल से भी ऊंचा उठाकर बनाते हैं। नतीजतन दूसरे सड़कों पर पानी भर जाता है। तकनीकी अधिकारी व संबंधित अधिकारी मौके पर जाकर लेवल की जांच नहीं करते हैं। ठेकेदार जिस तरह से भी सड़क बनाते हैं, उसी को पास कर दिया जाता है। शहर में एक भी सरकारी आफिस या संस्थान नहीं है, जिसमें जलभराव की समस्या ना हो। शहर में सीनियर सेकेंडरी स्कूल, पालिटेक्निक, ग‌र्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, वूमेन कालेज, टीबी अस्पताल, नागरिक अस्पताल, पीजी कालेज, हेड पोस्ट आफिस, गर्ल आइटीआइ, फूड सप्लाई आफिस, ओलंपिक क्लब, रेस्ट हाउस पीडब्ल्यूडी, बस स्टैंड, बिजली विभाग व उपायुक्त निवास भी जलभराव की समस्या से अछूता नहीं है। शहर की जनता जलभराव की समस्या से लंबे समय से परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों तथा ठेकेदारों ने जनता के पैसे का दुरुपयोग किया है, इसकी जांच करवाई जाए।

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