सड़क हादसे के घायलों के लिए बड़ी राहत, 7 दिन तक 1.5 लाख का फ्री इलाज; जानिए हरियाणा सरकार की योजना
हरियाणा सरकार ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस उपचार और अज्ञात वाहन क्षतिपूर्ति योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं ...और पढ़ें

बैठक में निजी अस्पतालों को दिए निर्देश।
HighLights
सड़क दुर्घटना पीड़ितों को 7 दिन तक 1.5 लाख मुफ्त इलाज।
हिट एंड रन: मृत्यु पर 2 लाख, घायल को 50 हजार मुआवजा।
घायल को अस्पताल पहुंचाने पर नागरिक को कोई कानूनी बाध्यता नहीं।
जागरण संवाददाता, नारनौल। सड़क हादसे में हर सेकंड कीमती होता है और अक्सर पैसों की कमी या पहचान न हो पाने के कारण घायल को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे कई बार जान भी जा सकती है।
इसी समस्या के समाधान के लिए हरियाणा सरकार ने सड़क हादसा पीड़ितों के लिए विशेष योजनाएं चला रखी है। इन्हीं योजनाओं को जिले में प्रभावी ढंग से लागू करने के मकसद से बुधवार को लघु सचिवालय में उपायुक्त अनुपमा अंजली की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई।
बैठक में सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस उपचार योजना और अज्ञात वाहन क्षतिपूर्ति योजना (हिट एंड रन) 2022 पर चर्चा हुई।
आगे का खर्च स्वयं वहन करना होगा
डीसी ने बताया कि कैशलेस उपचार योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को दुर्घटना की तिथि से सात दिनों तक अधिकतम डेढ़ लाख रुपये तक का इलाज नजदीकी अस्पताल में पूरी तरह नि:शुल्क मिलता है। इसके बाद अगर इलाज जारी रखना पड़े तो आगे का खर्च घायल के स्वजन को स्वयं वहन करना होगा।
वहीं अज्ञात वाहन क्षतिपूर्ति योजना (हिट एंड रन) 2022 खासतौर पर उन मामलों के लिए बनाई गई है जहां वाहन चालक हादसा करके मौके से फरार हो जाता है और उसकी पहचान नहीं हो पाती, ऐसे मामलों में पीड़ित की मृत्यु होने पर स्वजन को दो लाख रुपए तथा गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति में 50 हजार रुपये तक का मुआवजा सरकार की ओर से दिया जाता है।
सड़क हादसा होने पर आम आदमी, अस्पताल संचालक और पुलिस की ये है जिम्मेदारी
पहला कदम
अगर किसी को सड़क हादसा होते हुए दिखे या हादसे के तुरंत बाद कोई घायल मिले, तो सबसे पहले 112 नंबर पर काल करके सूचना दें। यह हरियाणा पुलिस की इमरजेंसी हेल्पलाइन है और इसी नंबर से एंबुलेंस व पुलिस दोनों को सूचना पहुंच जाती है। काल करने वाले को अपनी पहचान बताने की कोई बाध्यता नहीं है और न ही किसी कानूनी कार्रवाई में फंसने का डर रखना चाहिए।
दूसरा कदम
सूचना मिलते ही एंबुलेंस या पुलिस मौके पर पहुंचकर घायल को नजदीकी पंजीकृत अस्पताल तक पहुंचाती है। अगर कोई आम नागरिक खुद अपने वाहन से घायल को अस्पताल ले जाता है, तब भी उसे कैशलेस योजना का लाभ मिलता है, बशर्ते पुलिस को हादसे की सूचना दी गई हो।
तीसरा कदम
मौके पर पहुंचकर पुलिस हादसे का ब्योरा ई-डार (इलेक्ट्रानिक विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट) नाम के आनलाइन सिस्टम में दर्ज करती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर तय होता है कि पीड़ित योजना का पात्र है या नहीं। पुलिस को यह सूचना दुर्घटना के 24 घंटे के भीतर दर्ज करनी होती है।
चौथा कदम
अस्पताल पहुंचते ही घायल का इलाज शुरू करने के लिए अस्पताल पहले पैसे नहीं मांग सकता। गैर-जानलेवा मामलों में 24 घंटे तक और जानलेवा मामलों में 48 घंटे तक स्थिरीकरण (स्टेबलाइजेशन) उपचार अनिवार्य रूप से दिया जाता है।
पांचवां कदम
अस्पताल इलाज, खर्च और दावे की पूरी जानकारी नेशनल हेल्थ अथारिटी के टीएमएस 2.0 पोर्टल पर अपलोड करता है। यहीं से अस्पताल को सरकार से सीधे भुगतान मिल जाता है, इसलिए मरीज या स्वजन को अस्पताल में पैसे जमा कराने की जरूरत नहीं पड़ती (7 दिन/डेढ़ लाख रुपए की सीमा तक)।
छठा कदम
अगर वाहन चालक फरार हो गया हो और उसकी पहचान न हो सके, तो पीड़ित या स्वजन घटना के छह महीने के भीतर संबंधित एसडीएम या जिलाधिकारी कार्यालय में मुआवजे के लिए निर्धारित फार्म जमा कर सकते हैं। पुलिस की प्राथमिकी की कापी इसमें अहम दस्तावेज होती है।
सातवां कदम- मुआवजे का भुगतान
जिला स्तरीय कमेटी मामले की जांच के बाद मृत्यु होने पर दो लाख रुपये और गंभीर घायल होने पर 50 हजार रुपये की राशि सीधे पीड़ित के बैंक खाते में ट्रांसफर करती है।
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