जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : जिम्बाब्वे अंबेसी के मुख्य अधिकारी काउंसलर लवमोरे नेबू ने कहा कि जिम्बाब्वे और भारत के बीच संस्कृति का आदान-प्रदान होगा। इस योजना के तहत जिम्बाब्वे के सांस्कृतिक ग्रुप भारत में आएंगे और भारत के ग्रुप जिम्बाव्वे में जाएंगे। दोनों देशों के बीच संस्कृति के आदान-प्रदान के साथ एग्रो बेस प्रोड्क्टस और सिमेंट जैसे व्यवसाय करने के प्रस्ताव पर भी विचार विमर्श किया जा रहा है। इतना ही नहीं दोनों देशों के बीच पर्यटन की संभावनाओं की भी तालाश की जाएगी। वह शनिवार को शिल्प और सरस मेले का भ्रमण करने कुरुक्षेत्र पहुंचे थे। इस मौके पर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड कार्यालय में उन्हें पवित्र गीता भेंट की गई। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थली कुरुक्षेत्र के साथ-साथ भारत में पर्यटन को लेकर आपार संभावनाएं हैं, कुरुक्षेत्र और भारत की भूमि के कण-कण में इतिहास छिपा है। इस इतिहास को दुनिया के बीच ले जाने के लिए जिम्बाब्वे अपनी अहम भूमिका निभाएगा। इतना ही नहीं जिम्बाव्वे में दुनिया के सात अजूबों में से एक अजूबा वाटरफाल का भी है। इस अजूबे के साथ-साथ जिम्बाब्वे के अन्य पर्यटन स्थलों को भी दुनिया को दिखाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि महोत्सव में आने का सुनहरी अवसर मिला है और इस महोत्सव के दौरान शिल्पकला और भारत के विभिन्न देशों की लोक संस्कृति को देखकर सुखद एहसास हुआ है। यहां पहुंचने पर केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा, सूचना जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के संयुक्त निदेशक एवं सीईओ केडीबी गगनदीप सिंह, भाजपा के जिला अध्यक्ष धर्मबीर मिर्जापुर, केडीबी सदस्य रविद्र सांगवान, सौरभ चौधरी ने जिम्बाब्वे एंबेसी के चीफ आफिसर काउंसलर लव मोरे नेबू व राजनीतिक काउंसलर ब्राइट जिवा को पवित्र ग्रंथ गीता भेंट कर सम्मनित किया।

Posted By: Jagran

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