- समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है लेखक जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिदी विभाग में शनिवार को अपने लेखक से संवाद करें कार्यक्रम किया गया। मुख्यातिथि नेशनल बुक ट्रस्ट आफ इंडिया के संपादक एवं लेखक पंकज चतुर्वेदी रहे। उन्होंने एक लेखक की समाज और राष्ट्र निर्माण में भूमिका विषय पर अपनी बात रखी।

उन्होंने कहा कि एक लेखक समाज की विभिन्न समस्याओं और मुद्दों को अपने साहित्य का विषय बनाकर प्रस्तुत करता है। इससे समाज पर उसका गहरा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि लेखक बनने की प्रक्रिया में विषयों और विधाओं का चयन सोच समझकर करना पड़ता है। लेखन के उद्देश्य, विवेकशील आलोचनात्मक दृष्टि तथा विरासत के लेखन को आत्मसात करके ही सार्थक लेखन संभव है। अपने आसपास के परिवेश को बारीकी से देखना व उस परिस्थिति के विभिन्न आयामों से विचार करना लेखन के लिए आवश्यक है। उन्होंने आनलाइन कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों के सवालों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासा को शांत किया।

लेखक के योगदान से कर सकते स्वस्थ समाज की परिकल्पना

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुवि के हिदी विभाग के अध्यक्ष डा. सुभाष चंद्र ने कहा कहा कि लेखक व साहित्यकार अपने साहित्य के माध्यम से समाज में व्याप्त अनेक संकीर्णताओं और रूढि़यों पर प्रहार करता है। हर लेखक को दृष्टि अर्जित करने के संघर्ष से गुजरना होता है। लेखक के योगदान से ही एक अच्छे और स्वच्छ समाज के निर्माण की परिकल्पना की जा सकती है। इस कार्यक्रम में डा. जसबीर सिंह, ब्रजपाल, विकास साल्याण, राजकुमार जांगड़ा, डा. रविन्द्र गासो, राम मोहन राय व अरुण कैहरबा भी जुड़े रहे।

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