जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : हरियाणा साहित्य अकादमी के बाबू बाल मुकुंद गुप्त सम्मान से पुरस्कृत रामकुमार आत्रेय नहीं रहे। रविवार को सुबह करीब चार बजे पीजीआइ चंडीगढ़ में उन्होंने अंतिम सांस ली। यह सूचना जैसे ही हरियाणा साहित्य जगत से जुड़े लेखक और कवियों को मिली, उन्होंने अपनी ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सोशल साइट्स पर उनके परिचितों ने शोक जताया। अंतिम दर्शन के बाद उनका रविवार को ही अंतिम संस्कार कर दिया गया।

गौरतलब है कि वर्ष 2011 में उन्हें बाबू बाल मुकुंद गुप्त सम्मान से तत्कालीन राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया दिया था। 14 सितंबर को वे हिदी दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम से अपने घर लौट रहे थे और अपने पौत्र की मोटरसाइकिल के पीछे सवार थे। एलएनजेपी अस्पताल के सामने चौक पर एक कार चालक ने उनके पौत्र की मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी। उसमें वे घायल हो गए थे। चार दिन अस्पताल में दाखिल होने के बाद उनको छुट्टी मिल गई थी, लेकिन शनिवार को एकाएक उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें चिकित्सकों ने पीजीआइ रेफर कर दिया था। इसके बाद पीजीआइ में रविवार को सुबह चार बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

कविता-कहानी के अलावा हरियाणवी दोहों का भी किया है संकलन

पेशे से शिक्षक रहे रामकुमार आत्रेय 2002 में सेवानिवृत्त होने के बाद अपना पूरा समय साहित्य को दे रहे थे। उन्होंने पांच कविता संग्रह, चार लघु कथा संग्रह, चार बाल कथा संग्रह, एक कहानी संग्रह, एक हरियाणवी दोहों का संकलन किया और अभी भी वे कवि सम्मेलन व हिदी गोष्ठियों में मुख्य वक्ता के तौर पर शिरकत करते थे। भले ही 75 वर्षीय रामकुमार आत्रेय की दृष्टि अब उनके लेखन को प्रभावित कर रही थीं, लेकिन वे अपने पौत्र की मदद से अभी भी अपनी लेखनी को अमलीजामा पहना रहे थे। देश भर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में भी समय-समय पर उनके लेख छपते रहे हैं। वे बताते थे कि उन्होंने लेखन की शुरुआत तो पढ़ाई के दौरान ही कर दी थी लेकिन इसमें दक्षता 1970 में स्नातकोत्तर करने के बाद मिली थी। इसके बाद उन्होंने कविता संग्रह, लघु कथा संग्रह के साथ कई अन्य संग्रह भी लिखे हैं।

आत्रेय को मिले ये सम्मान

1977 में हरियाणा साहित्य अकादमी से श्रेष्ठ कृति पुरस्कार, 2004 में हंस कविता पुरस्कार, 2008 में लघु कथा गौरव सम्मान पुरस्कार, 2011 बाल प्रहरी साहित्य श्री सम्मान से सम्मानित हो चुके थे।

Posted By: Jagran

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