जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : सड़कों पर सिग्नल, डिवाइडर का न होना, सड़कों की खराब दशा, चौराहों पर ट्रैफिक लाइट या किसी पुलिस वाले का मौजूद न होना यातायात व परिवहन विभाग की कमियों को उजागर करता है। इन खामियों को दूर करके सड़क हादसों में गुणात्मक रूप से कमी लाई जा सकती है। इसके साथ ही नियमों को तोड़ना लोग अपना अधिकार समझते हैं। इन पर सख्ती करने वाले ही ढील बरतते हैं। इसके परिणाम सड़क दुर्घटनाओं के रूप में सामने आते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से वर्ष 2011-2020 के दशक को सड़क सुरक्षा दशक घोषित किया हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक पूरे विश्व में प्रतिवर्ष 13 लाख लोग सड़क हादसों में मारे जाते हैं और यदि सड़क सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह संख्या वर्ष 2020 तक 19 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार घायलों में से 30 प्रतिशत लोग एक माह के अंदर ही मार जाते हैं। ट्रैफिक कर्मियों की कमी

देश में सभी सैन्य बलों के मुकाबले ट्रैफिक पुलिस बल काफी कम है। इनकी संख्या तकरीबन 40 हजार है, जबकि देश में पंजीकृत गाड़ियों की संख्या 20 लाख से भी अधिक है। इसके अलावा अन्य वाहन जैसे साइकिल, रिक्शा भी बड़ी संख्या में सड़क पर जगह घेरते हैं। कर्मचारियों की कमी के कारण सड़क पर नियमों का उल्लंघन होता है, जिससे हादसे होते हैं। ड्राइविग लाइसेंस में भ्रष्टाचार

अशोक पुरी पब्लिक रोड सेफ्टी एसोसिएशन के सदस्य अधिवक्ता जगरूप सिंह ने कहा कि ड्राइविग लाइसेंस बनवाने में खुले आम बेइमानी करके ड्राइविग लाइसेंस बनाए जाते हैं। वहीं चालक जो यातायात के नियमों के बारे में कुछ नहीं जानते जब सड़क पर उतरते हैं तो हादसों का कारण बनते हैं। बड़ी बात की बड़ी संख्या में यातायात पुलिस में भ्रष्टाचार बहुत अधिक हैं। जानकारों का मानना है कि नए यातायात नियमों का उल्लंघन करने में बड़ी जुर्माना राशि से यह भ्रष्टाचार और बढ़ेगा। प्रदेश के लोग पहले भारी वाहनों के लाइसेंस बाहरी राज्यों से बनवाकर लाते हैं, जो फर्जी भी पाए गए। अब प्रदेश सरकार ने खुद प्रशिक्षण देकर भारी वाहनों के लाइसेंस जारी किए हैं। अपर्याप्त संसाधन

यातायात व परिवहन विभाग के पास संसाधनों की बड़ी कमी है। न तो सड़क पर गश्त लगाने के लिए पर्याप्त वाहन और न ही संकेतक मौजूद है। किसी दुर्घटना की स्थिति में प्राथमिक चिकित्सा देने का प्रशिक्षण भी नहीं दिया जाता है। ऐसे में सड़क पर खड़े कर्मचारी दुर्घटना की स्थिति में मददगार की भूमिका नहीं निभा पाते। यातायात सुरक्षा अभियान भी विफल

यातायात पुलिस व सड़क संगठनों की ओर से वाहन चालकों व स्कूली बच्चों को यातायात सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाता है, मगर प्रत्येक स्कूल में नाबालिग दो पहिया वाहन लेकर आते है। बेशक स्कूल प्रशासन यह कह कर अपना पल्ला झाड़ ले कि वे स्कूल परिसर में वाहन लेकर विद्यार्थियों को नहीं आने देते, मगर उन्हें ऐसा करने से रोकने की जिम्मेदारी किसकी है। अभिभावक भी बच्चों को रेसिग गाड़ियां दिलवा देते हैं। जिससे बच्चे तेज गति से वाहनों को सड़कों पर दौड़ाते हैं। नियमित करते हैं चालान : नरेश कुमार

जिला यातायात समन्वयक नरेश कुमार का कहना है कि यातायात पुलिस नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार चालान कर रही है। एसपी के निदेशानुसार प्रत्येक चौक पर यातायात पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग पर गति जांच वैन की मदद से वाहनों की जांच हो रही है। यातायात नियमों की पालन कराने के लिए स्कूलों में लगातार कार्यक्रम किए जा रहे हैं।

Posted By: Jagran

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