जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र :

प्रदेश सरकार की ओर से कुरुक्षेत्र के छह ब्लॉक में लागू की गई मेरा पानी-मेरी विरासत योजना को अम्लीजामा पहनाने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने एडी-चोटी का जोर लगा दिया है। इसके लिए विभाग की ओर से सभी अधिकारियों को फील्ड में उतारा गया है। फील्ड में उतरे यही अधिकारी किसानों से संपर्क कर उनसे योजना को लेकर सहमति ले रहे हैं। इसके साथ ही उनका पंजीकरण भी कर रहे हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल स्वयं इस योजना पर ध्यान दे रहे हैं। ऐसे में अधिकारी प्रतिदिन पोर्टल पर डाटा भी अपडेट कर रहे हैं।

जिला भर में पौने तीन लाख हेक्टेयर के करीब है कृषि योग्य भूमि

कुरुक्षेत्र में पौने तीन लाख हेक्टेयर के करीब कृषि योग्य भूमि है। इस भूमि में करीब 52 हजार किसान परिवार खेती का काम करते हैं। ऐसे में योजना को सही तरीके से लागू करने के लिए इन सभी किसानों को जागरूक किया जाना जरूरी है। इसी के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने अपने सभी अधिकारियों को फील्ड में उतार दिया है। यही अधिकारी अपने-अपने संबंधित क्षेत्र में किसानों के पास पहुंचकर उनकी कुल कृषि योग्य भूमि का ब्यौरा तैयार कर रहे हैं। बाकायदा इसके लिए किसानों ने सहमति भी ली जा रही हैं। दिन भर की वर्किंग के बाद इसी डाटा को प्रति दिन पोर्टल पर अपडेट किया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसी की ओर से भी रिपोर्ट पर नजर रखी जा रही है। इन कस्बों के लिए है योजना

कुरुक्षेत्र जिला के चार ब्लॉक पिपली, शाहाबाद, बाबैन व इस्माईलाबाद में भूमिगत पानी का स्तर 40 मीटर से अधिक है। इन ब्लॉक में मेरा पानी-मेरी विरासत योजना को लागू किया गया है। इस योजना के तहत इन ब्लॉक के किसानों को अपनी कृषि योग्य भूमि में 50 प्रतिशत से कम में धान की बिजाई करनी होगी। इसकी जगह पर उन्हें वैक्लपिक खेती मक्का, कपास, बाजरा और दालों की बिजाई करनी होगी। इन किसानों को सरकार की ओर से सात हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से सहयोग राशि जारी की जाएगी। इसके साथ ही थानेसर और पिहोवा में भूमिगत पानी का स्तर 35 मीटर से अधिक होने के चलते पंचायती भूमि में धान नहीं लगाया जा सकेगा। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डा. प्रदीप मील ने बताया कि अधिकारी किसानों के पास पहुंचकर उनके पंजीकरण करने के साथ-साथ सहमति ले रहे हैं। अभी तक ही एक हजार एकड़ के करीब में किसानों ने मक्का बिजाई के लिए सहमति जताई है। अभी किसानों के पास सोचने के लिए 10-15 दिन का समय है। किसान इस योजना के प्रति सकारात्मक हैं। अधिकारी किसानों के पास पहुंचकर जागरूक कर रहे हैं। इससे किसान को भी फायदा होगा।

Posted By: Jagran

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