जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के करीब 1800 कर्मचारियों को तीन साल से सातवें वेतन आयोग और एरियर का इंतजार है। लंबे समय से इन कर्मचारियों का 35 करोड़ रुपये का एरियर सरकार के पास रुका हुआ है। बड़ी बात यह है कि प्रदेश के दूसरे विश्वविद्यालयों में शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारियों को वेतन और एरियर मिल चुका है। मसला इतना सा ही नहीं है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में लागू नहीं होने के चलते शिक्षकों की नई भर्ती भी अटकी हुई है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय से रोस्टर प्वाइंट प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा निदेशालय को भेजा जा चुका है। निदेशालय ने इसे आगे नहीं भेजा, जिसके चलते शिक्षकों की भर्ती में आरक्षण और नियुक्ति को ब्रेक लग गए हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (कुटा) के प्रधान डॉ. संजीव शर्मा का कहना है कि तीन साल से इस मांग को लेकर शिक्षक संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही।

डॉ.शर्मा ने कहा कि प्रदेश के सभी कॉलेजों में व विश्वविद्यालयों में सातवें वेतन आयोग का लाभ व एरियर मिल चुका है, लेकिन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की प्रदेश का एकमात्र विश्वविद्यालय है जहां कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग व उसके एरियर के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। पिछले तीन वर्षों से एरियर का भुगतान लंबित है इसके लिए राज्य सरकार चितित नहीं है। कुटा इस संबंध में इस बार सरकार से सातवें वेतन आयोग के एरियर के लिए बजट की मांग कर चुकी है लेकिन प्रदेश की पहली ए-प्लस यूनिवर्सिटी होने के बाद भी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सातवें वेतन आयोग की गाइडलाइन मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कभी की जारी कर दी है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया गया है। विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कमी के कारण शैक्षणिक कार्य व शिक्षकों की पदोन्नति प्रभावित हो रही है। दो दशक से उम्र बढ़ाने की लड़ाई

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शिक्षक दो दशक से सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष करवाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। डॉ.संजीव शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने यह कर दिया है। उत्तरप्रदेश में योगी सरकार ने भी इसे मंजूरी दे दी है और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में तो यह शुरु से ही चल रहा है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में इसे लागू करने की जरूरत है, क्योंकि स्टाफ की भारी कमी है।

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