जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित सांस्कृतिक उत्सव रत्नावली में सामाजिक मुद्दों पर चौपालों में होने वाली बहस का जीवंत किया गया। उत्सव में बुधवार को आयोजित चौपाल प्रतियोगिता में युवाओं ने हरियाणा के माथे पर सबसे बड़े कलंक रहे ऑनर कि¨लग पर युवाओं ने लंबी बहस की और गोत्र विवाद को लेकर भी खूब चर्चा उठी। इसके साथ ही कुवि में आयोजित रत्नावली के हर मंच से स्वदेशी अपनाने और खासकर चीन निर्मित सामान का बहिष्कार करने के संदेश को भी पूरे जोर-शोर से चला। चाहे चौपाल हो, कविता पाठ हो या फिर सांग तक हर मंच पर युवाओं ने स्वदेशी अपनाने की पुरजोर वकालत की। इसके साथ समारोह के तीसरे दिन दर्शकों का जोश तिगुना ही नजर आया। आसपास के गांव से बुजुर्ग से लेकर, युवा और महिलाएं भी हरियाणा सांस्कृतिक उत्सव की गवाह बनी।

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में तीन दिनों से सांस्कृतिक उत्सव रत्नावली की धूम है। पूरा विश्वविद्यालय हरियाणवी संस्कृति के रंग में रंगा है। कार्यक्रम में और इसके अलावा परिसर में पूरा दिन सैकड़ों की संख्या में लोग पगड़ी में नजर आए और मंचों पर हरियाणवी कला का मंचन हुआ। कुवि के ऑडीटोरियम में आयोजित चौपाल कार्यक्रम में सात टीमों ने भाग लिया। जिनमें से कई महिला कॉलेजों की टीम ने भी अपनी प्रस्तुति दी।

डीएवी कन्या महाविद्यालय यमुनानगर, बीपीएस महिला विश्वविद्यालय सोनीपत की टीमों में चौपाल पर महिलाएं नजर आई। दोनों ही टीमों ने गौत्र विवाद पर चर्चा की। हालांकि चौपाल पर गोत्र मामले में समाज के अनुरूप बात की गई और अपने गोत्र में विवाह को अच्छा नहीं दर्शाया गया। हालांकि ऑनर कि¨लग पर कटाक्ष के रूप में हरियाणा में इसे कलंक का दर्जा जरूर दे दिया गया।

उठी महिलाओं के अधिकारों को लेकर आवाज

चौपाल पर आर्य पीजी कॉलेज पानीपत की टीम ने पुरजोर तरीके से महिला अधिकारों को रखा। हरियाणा में महिलाओं को चौपाल पर चढ़ने की मनाही है। टीम में शिक्षित बहू और बेटी चौपाल में जाकर गांव के विकास के लिए पुरुषों से बात करती है और महिला अधिकारों के बारे में जागृत करती है। इसके अलावा सीआर किसान कॉलेज जींद की टीम ने खेलों को बढ़ावा देने को लेकर सरकार की योजनाओं पर जबरदस्त कटाक्ष किया।

सांस्कृतिक परिधान प्रतियोगिता में दिखी हरियाणा की झलक

उत्सव में आयोजित हरियाणवी परिधान प्रतियोगिता में सांस्कृतिक परिधान में हरियाणा की झलक दिखी। युवाओं ने शादी के लिए हरियाणवी दुल्हन का लिबास, दूल्हा मोड़ के साथ, खेत में जाता किसान, पनिहारिन, किसान महिला, आधुनिक युवक-युवतियां आदि कई परिधानों में नजर आए। युवाओं ने इनका अपने अंदाज में आनंद लिया।

युवाओं ने खूब मचाया धमाल

एक ओर जहां कुवि के मंचों पर कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है वहीं दूसरी और प्रदेश भर से आए युवा अपने ही रंग में दिखे। खुले मंच के पास ढोल, बीन, डुगडुगी, सारंगी की धुनों पर युवाओं ने खूब मस्ती की। खुले मंच पर दोपहर दो बजे सांग का आयोजन होना था इससे पहले खाली मंच के पास युवा खूब नाचे। युवतियों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। हर कोई अपनी ही मस्ती में नजर आ रहा था। खासबात ये थी कि हर चेहरे पर हरियाणवी रंगत और सांस्कृतिक महक जरूर नजर आ रही थी। धुन भी सभी हरियाणवी गानों की थी।

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