जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र: नुक्कड़ नाटकों के लिए विख्यात शहर की सामाजिक संस्था किशोर दा संगीत नाट्य ग्रुप ने अखिल भारतीय राष्ट्रीय नाट्य नृत्य महोत्सव में हरियाणा की कला का प्रदर्शन किया। संस्था के अध्यक्ष किशोर दत्त ने बताया कि नोएडा (उत्तर प्रदेश) में प्रो. राजेंद्र सिंह प्रदर्शनकारी कला शिक्षण संस्थान आगरा एवं होली पब्लिक स्कूल नोएडा द्वारा 4 दिवसीय आयोजित इस समारोह में इस ग्रुप ने नुक्कड़ नाटक अभिनेता में तृतीय, श्रीधरण वाकणकार अवार्ड, सर्वश्रेष्ठ नुक्कड़ नाटक अभिनेत्री में तृतीय पुरस्कार, समूह लोक नृत्य (जूनियर वर्ग ) में द्वितीय, सर्वश्रेष्ठ रंग जुलूस में सामाजिक एवं राजनैतिक झांकी की प्रस्तुति में प्रथम, सर्वश्रेष्ठ बाल अभिनेता में प्रथम और गुजेश्वरी सिंह अवार्ड प्राप्त करके शहर का नाम रोशन किया। कुरुक्षेत्र की किशोर दा संगीत नाट्य ट्रस्ट ने विभिन्न कलाओं में भाग लिया। संस्था ने लोक नृत्य (भांगड़ा) की भी प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि स्वच्छ भारत पर आधारित नुक्कड़ नाटक गांधी जी के सपने में अभिनेता किशोर दत्त ने तीसरा स्थान प्राप्त करके श्रीधरणवाकणकर अवार्ड हासिल किया। इसके अलावा सर्वश्रेष्ठ नाट्य रबड़ी की अध्यक्षता इसी ग्रुप द्वारा की गई। नाटक रबड़ी में अभिनेत्री मनीषा शर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त करके राजेश्वरी सिंह अवार्ड प्राप्त किया। बाल अभिनेता धैर्य ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। लोक नृत्य भांगड़ा में जूनियर वर्ग टीम ने दूसरा स्थान हासिल किया। इसी तरह तबला वादक स्वास्तिक ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा कलाकार पवन शर्मा, नमन, कनिष्क, परमजीत कौर, वंश, शुभम, अभिषेक, हर्ष मिगलानी, दिग्विजय और समर्थ ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। स्वच्छ भारत पर आधारित रहा नुक्कड़ नाटक गांधी जी के सपने

इस नाटक में दर्शाया गया कि हमें अपने घर व आसपास स्वच्छता रखनी चाहिए। कूड़ा नहीं फैलाना चाहिए। नाटक में दर्शाया गया कि आज हम वायु, जल व ध्वनि इत्यादि प्रदूषण में जी रहे है और खतरनाक बीमारियों से लड़ रहे है। नाटक में वृक्षारोपण और जल संरक्षण का भी संदेश दिया गया। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर आधारित रहा नाटक रबड़ी

इस नाटक में दिखाया गया कि एक दलित महिला झम्कू किस तरह मेहनत मजदूरी करके अपनी दोनों अपाहिज बेटियों की परवरिश करके काबिल अफसर बनाती है। झम्कू एक अपाहिज लड़की पंखुडी को जन्म देती है जिस पर उसका पति व ससुराल वाले घर से निकाल देते है। वह पंखुडी को लेकर दर-दर की ठोकरें खाती है। तभी उसे एक एनआरआइ परिवार मिलता है जिसे वह अपनी कोख उधार पर दे देती है और संयोगवंश पुन: एक अपाहिज लड़की रबड़ी को जन्म देती है। ससुराल वालों की तरह एनआरआइ परिवार भी उस लड़की को स्वीकार नही करता। झम्कू हिम्मत नही हारती और कठिन संघर्ष करके अपनी दोनों अपाहिज बेटियों को पढ़ा लिखाकर उनकी बेहतर परवरिश करती है।

Posted By: Jagran

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