जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : गांव कमोदा के श्री काम्यकेश्वर महादेव मंदिर एवं तीर्थ पर कार्तिक माह की तीन नवंबर को शुक्ला सप्तमी मेला लगेगा। तीर्थ में शुक्ला सप्तमी के शुभ अवसर पर स्नान करने से मोक्ष प्राप्त होता है। शुक्रवार को तीर्थ में स्वच्छ जल भरा गया। ग्रामीणों द्वारा मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

मंदिर को लड़ियों से सजाया गया है, मंदिर पर रंगरोगन का कार्य पूर्ण हो चुका है। महर्षि पुलस्त्य और महर्षि लोमहर्षण ने वामन पुराण में यकवन में बताया कि इस तीर्थ की उत्पत्ति महाभारत काल से पूर्व की है। एक वार नैमिषारण्य के निवासी बहुत ज्यादा संख्या में कुरुक्षेत्र की भूमि के अंतर्गत सरस्वती नदी में स्नान करने हेतु काम्यवक वन में आए थे। वे सरस्वती में स्नान न कर सके। उन्होंने यज्ञोपवितिक नामक तीर्थ की कल्पना की और स्नान किया, फिर भी शेष लोग उस में प्रवेश ना पा सके तब से मां सरस्वती ने उनकी इच्छा पूर्ण करने के लिए साक्षात कुंज रूप में प्रकट होकर दर्शन दिए और पश्चिम-वाहनी होकर बहने लगी। इससे स्पष्ट होता है कि काम्यकेश्वर तीर्थ एवं मंदिर की उत्पति महाभारत काल से पूर्व की है।

Posted By: Jagran

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