जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र: पवित्र ग्रंथ गीता और कुरान में मोहब्बत, अमन और शांति का संदेश निहित है। कुरान ही नहीं, बल्कि किसी भी धर्म की शिक्षा कट्टरवाद, आतंकवाद और मार-काट का संदेश नहीं देती। प्रत्येक धर्म की शिक्षा में प्रेम, शांति का संदेश ही समाया हुआ है। इसी संदेश को लेकर अमादिया मुस्लिम जमात इंडिया के अनुयायी देश के कोने-कोने से आने वाले पर्यटकों के लिए पहुंचे हैं।

अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने करीब एक दर्जन से ज्यादा स्टाल क्राफ्ट मेले में लगाए हैं। बटाला के गांव कादियान से तीसरी बार मुबारक शाह कुरान की शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए यहां पहुंचे हैं। अहमइय्यिा मुस्लिम जमाअत भारत के अनुयायी मुबारक शाह और मोहम्मद आरिफ ने बातचीत करते हुए बताया कि महोत्सव के इतिहास के बारे में सुना और यह सुनते ही अपने आप को रोक नहीं पाए। मानव गीता का संदेश उन्हें भगवान श्रीकृष्ण की पावन धरा कुरुक्षेत्र पर बुला रहा है। मुबारक शाह ने अपने स्टाल पर लगाई गई मुख्य पुस्तकों मिर्जा मसरूर अहमद द्वारा लिखी पुस्तक व‌र्ल्ड क्राइसेट एंड द पाथ वे टू पीस, शांति पथ, विश्व संकट तथा शांति पथ, अहमइय्या मुस्लिम जमाअत भारत शांति का आह्वान आदि के बारे में बताया कि कुरान की शिक्षा में केवल अमन और शांति का पाठ ही पढ़ाया जाता है। जो लोग कट्टरवाद, आइएसआइएस और धर्म की शिक्षा देकर अपने किसी उद्देश्य को सार्थक कर रहे हैं, वे सही मायनों में किसी धर्म के चाहवान नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी संस्था के करीब 50 लाख लोग पाकिस्तान में रहते हैं जो अमन और शांति की शिक्षा देते हैं, लेकिन पाकिस्तान में उनके समुदाय के लोगों को शांति का पाठ पढ़ाने के नाम पर एक कानून के तहत तीन साल की सजा सुना दी जाती है।

Posted By: Jagran

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