मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

पंकज आत्रेय, कुरुक्षेत्र : हरियाणा की बेटी सुषमा स्वराज को कुरुक्षेत्र की धरती और श्रीमद्भावगत गीता से बेहद लगाव था। गीता के सार को ही वे जीवन का आधार मानतीं थीं। गीतास्थली पर आने का वह कोई मौका नहीं चूकती थीं। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2018 में 18 दिसंबर को वे 18 हजार बच्चों के श्लोकोच्चारण कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि पहुंची थीं। उन्होंने यहां गीता और अपने जीवन के संबंध को सार्वजनिक किया। उन्होंने कहा था, गीता हर कदम पर मेरी प्रेरणा रही है। जब मैं बीमार हुई तो यही मेरी संबल बनी। मेरे जीवन का आधार गीता ही है। हर रोज इसके पांच श्लोक पढ़कर मैं अपना काम शुरु करती हूं और उन्हें अपनी दिनचर्या में उतारने का प्रयास करती हूं। शाम को मंथन करती हूं कि इसमें मैं कितना कामयाबी रही। सुषमा स्वराज के जीवन पर गीता का प्रभाव स्पष्ट दिखता भी था। उन्होंने कहा था कि कर्म ही जीवन में इंसान को आगे ले जाता है। बच्चों को उन्होंने संदेश दिया था कि मेहनत के बूते ही सफलता हासिल की सकती है। विश्व कल्याण के लिए प्रत्येक युवा को जियो गीता का संदेशवाहक बनना होगा। इसके लिए प्रत्येक युवा को गीता में जीना होगा और प्रत्येक दिन कम से कम पवित्र ग्रंथ गीता के दो श्लोकों को अपने जीवन में धारण करना होगा। इस दौरान सुषमा स्वराज ने 700 श्लोकों को कंठस्थ करने वाले पानीपत के छात्र हर्षवर्धन जैन को सम्मानित भी किया था।

गीता जयंती को बनाया अंतरराष्ट्रीय

कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने बताया कि सुषमा को वे स्वामी ज्ञानानंद के साथ गीता जयंती महोत्सव का निमंत्रण देने गए थे। पहले झटके में ही उन्होंने हामी भर ली। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सपने को पूरा करने में उनकी बड़ी भूमिका रही, क्योंकि उन्होंने ही गीता जयंती उत्सव को अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का स्वरूप दिलवाया। विदेश मंत्री रहते हुए उन्होंने पहले मॉरीशस में और इस बार लंदन में गीता महोत्सव की नींव रखी।

एक हजार गीता भेंट की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह सुषमा स्वराज भी अपने साथ हमेशा गीता रखा करतीं थीं। विदेश मंत्री रहते हुए उन्होंने विदेशी दौरों पर हर उच्चायुक्त को गीता भेंट की। छाबड़ा अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के लिए इन दिनों लंदन में हैं। उन्होंने बताया कि वहां वे भारतीय उच्चायुक्त रुचि घनश्याम से मिले। सुषमा स्वराज की मृत्यु के बारे में वे व्यथित हैं। उन्होंने गीता दिखाते हुए बताया कि यह सुषमा स्वराज ने ही उन्हें भेंट की। सुषमा ने गीता की एक हजार से ज्यादा प्रतियां लोगों को भेंट की और यह गीता ज्ञान संस्थानम की गीता प्रेरणा होती थी।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप