जगमहेंद्र सरोहा, कुरुक्षेत्र : धर्मनगरी में चावल कस्टम मीलिग में घोटाले की बू उठने लगी है। मिल मालिकों ने लॉकडाउन के दौरान खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के दिए जाने वाले धान से पूरा चावल अब तक नहीं लौटाया है। इस दायरे में करीब 25 मिल मालिक हैं। इनको 15 जुलाई तक पूरा चावल देने की हिदायत दी गई है। माना जा रहा है कि उक्त मिलर चावल निकालकर महंगे रेट में बेच गए। अब सस्ता चावल लाकर सरकारी कोटा पूरा करने की तैयारी में है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग

लॉकडाउन के दौरान खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने जिले के 238 मिलों को 11,47,366 मीट्रिक टन धान दिया था। मिल मालिकों को इसका चावल निकालकर वापस डीएफएससी को देना था। जिले में 7,68,735 मीट्रिक टन चावल दिया है। विभाग का दावा है कि इसमें से 6,45,890 मीट्रिक टन चावल की सप्लाई कर दी है। 1,22,845 मीट्रिक टन की सप्लाई बाकी है। जिले में चावल की 70 फीसद से कम डिलीवरी हुई है। दो महीने का अतिरिक्त समय लेने के बाद भी सप्लाई नहीं

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने धान के सीजन और बाद में चावल निकालने की लिए धान दिया था। उनको 30 अप्रैल तक सप्लाई देनी थी। कोरोना वायरस महामारी के चलते मिल मालिकों ने समय मांगा था। इनको दो महीने का समय दिया था। इस हिसाब से उनको 30 जून तक सप्लाई देनी थी। अब तक 70 फीसद से भी कम डिलीवरी मिली है। मिल मालिकों ने लॉकडाउन में श्रमिक न मिलने की कही

जिले में पूरी सप्लाई न देने वाले मिलों की संख्या 25 है। डीएफएससी राजेश्वर मौदगिल ने सोमवार को ऐसे मिल मालिकों की अपने कार्यालय में बैठक ली। उनको चावल जल्द वापस करने की बात कही और 15 जुलाई तक का समय दिया। मिल मालिकों ने अपनी सफाई में कहा कि लॉकडाउन के दौरान लेबर नहीं मिल पाई थी। जिसके चलते चावल नहीं निकाला जा सका। मिलों में धान पड़ा है। अधिकारी इसकी जांच कर सकते हैं।

यह होती है कस्टम मीलिग

सरकार मिल मालिकों को चावल निकालने के लिए धान देता है। उनको 10 रुपये प्रति क्विंटल चार्ज देता है। एक क्विटल धान पर 67 किलोग्राम चावल मिल विभाग को वापस देता है। इसकी जिम्मेदारी खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की होती है। इसकी सप्लाई एफसीआइ को कराई जाती है।

कहां के कितने मिल

क्षेत्र संख्या

कुरुक्षेत्र 04

इस्माईलाबाद 05

पिहोवा 04

बाबैन 03

पिपली 02

झांसा 03

ठोल 04

कुल 25 मिल मालिकों को चावल निकालने के लिए धान दिया जाता है। लॉकडाउन के चलते लेबर नहीं मिल पाने पूरा चावल वापस नहीं दिया जा सका है। इसमें किसी तरह की गड़बड़ी या घोटाला नहीं है। मिल मालिक खुद तंगी से गुजर रहे हैं। सरकार से पैकेज की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

ज्वैल सिगला, चेयरमैन, हरियाणा राइस मिलर एसोसिएशन। जिले के 25 राइस मिलों से पूरा चावल वापस नहीं आया है। इसकी 15 जुलाई अंतिम तारीख है। मिल मालिकों की बैठक लेकर इसको समय पर लौटाने की हिदायत दी है। संबंधित अधिकारियों की एफसीआइ को चावल पहुंचाने की जिम्मेदारी लगाई गई है। मिल मालिक पूरा चावल वापस नहीं करते हैं तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।

राजेश्वरी मौदगिल, नियंत्रक, डीएफएससी, कुरुक्षेत्र ।

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