जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : भारतीय किसान यूनियन ने तीनों अध्यादेशों के विरोध में रविवार को प्रस्तावित जाम को लेकर रणनीति तैयार कर ली है। यूनियन की किसानों को साथ लेकर जिले में पांच मुख्य सड़कों को दोपहर 12 से तीन बजे तक जाम लगाने की तैयारी है। किसान नेताओं की इसको लेकर ड्यूटी भी लगा दी है। वहीं प्रशासन और पुलिस ने भी कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए कमर कस ली। छह डीएसपी सहित 293 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। जिले में 20 नाके लगाकर 104 पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया है।

भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान कृष्ण कुमार ने बताया कि जिले में जाम लगाने के लिए पांच स्थान चिह्नित किए गए हैं। इनमें कुरुक्षेत्र से यमुनानगर रोड का जाम गांव सूरा में जाम लगाया जाएगा। इसकी अगुवाई ब्लॉक प्रधान कंवरपाल डुडा और युवा ब्लॉक प्रधान नवीन सूरा करेंगे। पिहोवा युवा प्रधान सुखविदर मुकीमपुर के नेतृत्व में कुरुक्षेत्र से पिहोवा रोड पर गांव मुकीमपुरा, अंबाला-हिसार रोड पर इस्माईलाबाद में गुरनाम सिंह चम्मू के नेतृत्व में जाम लगाया जाएगा। शाहाबाद से पंचकूला रोड पर राधा स्वामी सत्संग भवन के पास ब्लाक प्रधान हरकेश खानपुर के नेतृत्व में जाम लगाने की तैयारी है। कुरुक्षेत्र से किरिमच रोड का गांव किरिमच चौक पर सोहन सिंह बारवा के नेतृत्व में जाम की तैयारी है। अध्यादेशों से कईं बात नहीं हो रही स्पष्ट

अग्रणी किसान जोगिद्र ने बताया कि अध्यादेशों से कई बातें स्पष्ट नहीं हो रही हैं। किसान की सभी फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाना चाहिए। खेती पर हर साल खर्च एक से तीन हजार रुपये प्रति एकड़ बढ़ रहा है। इसके मुकाबले में फसलों के दाम नहीं बढ़ रहे। इन अध्यादेशों के लागू होने के बाद किसानों को भय सता रहा है कि अगर बड़े औद्योगिक घरानों ने कांट्रेक्ट फार्मिंग शुरू कर दी तो छोटे किसान खत्म हो जाएंगे।

खरीद के लिए एमएसपी जरूरी

अग्रणी किसान महाबीर सिंह ने बताया कि किसानों के मन में अध्यादेशों लेकर बहुत सी शंकाएं हैं। इनको दूर करना जरूरी है। किसान को अपनी फसल कहीं भी बेचने की छूट दी जा रही है, लेकिन इसके लिए एमएसपी का तय होना भी जरूरी है। कई बार ऐसा हुआ है कि वह अपनी सब्जी को बेचने के लिए दिल्ली तक पहुंचे हैं, लेकिन वहां पर उन्हें कुरुक्षेत्र से भी कम दाम मिला। ऐसे में फसल बेचने की छूट के साथ एमएसपी भी तय किया जाएं। दूसरी ओर कांट्रेक्ट फार्मिंग में मुनाफा होने पर तो कंपनियां खरीद के बाद भुगतान कर देती हैं लेकिन मंदी आने पर कंपनियां फसल खरीदने और फसल लेकर भी भुगतान करने में आनाकानी करती हैं। उनको खुद कांट्रेक्ट फार्मिंग के तहत 2014 के आलू का भुगतान अब मिला है।

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