जागरण संवाददाता, करनाल : ट्यूशन पढ़ने आने वाली छात्रा से छेड़छाड़ करने के आरोपित टीचर को मंगलवार की देर शाम पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपित को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आरोपित शहर के प्रतिष्ठित स्कूल प्रताप पब्लिक में पढ़ाने के साथ-साथ सेक्टर-7 में फिजिक्स अकेडमी भी चलाता था। छात्रा के आरोप के बाद स्कूल प्रबंधन ने शिक्षक को सस्पेंड कर दिया था।

आरोपित बृजबीर सिंह पर 2 दिन पहले एक छात्रा ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। उसका कहना था कि वह कभी-कभी पढ़ने के लिए घर बुला लेते थे। वारदात के दिन भी उसे घर बुलाया। पढ़ाने के दौरान आरोपित ने अचानक उसका हाथ पकड़कर छेड़छाड़ की। घर आकर पीड़िता ने इसकी शिकायत परिजनों से की। पुलिस ने पीड़ित छात्रा के बयान चाइल्ड वेलफेयर कमेटी व कोर्ट में दर्ज करवाकर आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था।

थम नहीं रहे बच्चों के साथ शर्मनाक हरकतों के मामले

शहर के दो प्रतिष्ठित स्कूलों में विद्यार्थियों के साथ शर्मनाक हरकत के दो अलग-अलग मामले सामने आ चुके हैं। इससे अभिभावकों का स्कूल प्रबंधन से विश्वास कम हो रहा है। उनका कहना है कि ऐसा लग रहा है कि अभी भी सिस्टम में कहीं ना कहीं कोई चूक है। इस वजह से इस तरह की हरकतें सामने आ रही है। उनकी मांग है कि इस पर रोक लगाने के लिए स्कूल प्रबंधन को सख्त कदम उठाने चाहिए। क्योंकि यह उनके बच्चों की सुरक्षा का सवाल है।

अब भी ध्यान नहीं दे रहे स्कूल

अभिभावकों ने बताया कि अभी भी ज्यादातर स्कूल प्रबंधक इस तरह की हरकतों को रोकने की दिशा में ज्यादा गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। यदि वह मांग करते भी हैं तो आश्वासन दे दिया जाता है, लेकिन ऐसे इंतजाम नहीं है, जिससे अभिभावक संतुष्ट हो सकें कि उनका बच्चा स्कूल में सुरक्षित है। जिन दो स्कूल में इस तरह की हरकतों के आरोप लगे हैं, वह काफी प्रतिष्ठित हैं। इसके बाद भी इस तरह की हरकत सामने आना अपने आप में बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

कोई ऐसा मंच नहीं है, जहां शिकायत कर सकें

अभिभावक संतोष, कोमल व रजनी ने बताया कि स्कूलों में इस तरह के मामलों की शिकायत करने के एिल कोई मंच नहीं है। उन्हें पता ही नहीं कहां शिकायत कर सकते हैं? पुलिस को शिकायत करने से ज्यादातर अभिभावक कतराते हैं। होना यह चाहिए कि स्कूल के नोटिस बोर्ड पर ही यह जानकारी हो कि कहां अभिभावक इस तरह की शिकायत कर सकते हैं।

शिकायत पेटी तक नहीं है

कई स्कूलों में शिकायत पेटी तक नहीं हैं, जहां लड़कियां अपनी बात रख सके। हालांकि कमेटी तो हैं, लेकिन इसमें सिर्फ शिक्षकों और प्रिसिपल को ही शामिल किया जाता है। ऐसे में यदि बच्चों को कोई समस्या है तो वह डर के मारे कमेटी के सामने अपनी बात नहीं रख सकते हैं। इसलिए शिकायत पेटी होनी चाहिए। सीबीएसई के यह हैं निर्देश

सीबीएसई ने स्कूलों में प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सैक्सुअल आफेंस (पीओसीएसओ) एक्ट को लागू करने के लिए आदेश जारी कर दिए हैं। जिसके तहत पहली से लेकर बारहवीं क्लास तक के विद्यार्थियों को लड़का-लड़की में भेदभाव न करने और यौन शोषण को रोकने की जानकारी दी जाएगी। यही नहीं, कंटीन्यूअस कॉम्प्रिहेंसिव इवेल्यूएशन(सीसीई) स्कीम के तहत लाइफ स्किल्स पर आधारित 23 मॉड्यूल्स भी तैयार किए गए हैं। ट्रेनर्स बच्चों को बढ़ रही समस्याओं, भावनाओं को संभालना, सामाजिक अन्य भेदभाव के मुद्दों से निपटना भी सिखाएंगे। मैनुअल भी तैयार किया गया है। बारहवीं के लिए ह्यूमन राइट्स जेंडर स्टडी नाम का विषय भी शुरू किया जा रहा है। अभिभावक भी हों जागरूक

बच्चों के लिए काम कर रही संस्था आरजू की प्रवक्ता दीपिका शर्मा ने बताया कि अभिभावकों को भी इस बारे में सचेत होना होगा। हम सारी जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन पर डाल कर निश्चित नहीं हो सकते। अभिभावक एक तो अपने बच्चों से नियमित तौर पर बातचीत करते रहें। इससे उनमें विश्वास आएगा और वह हर बात अपने माता-पिता से शेयर कर सकते हैं। बच्चे यदि स्कूल जाने में आनाकानी करें, डरें या फिर कोई ऐसी हरकत करें, जो आपको अजीब लग रही हो तो तुरंत सचेत हो जाना चाहिए। बच्चा ऐसा क्यों कर रहा है, इसकी तह तक जाना चाहिए। माता-पिता की चौकसी इस तरह की हरकतों पर रोक लगाने में काफी अहम साबित हो सकती है।

Posted By: Jagran

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