जागरण संवाददाता, करनाल: करनाल-मेरठ रोड (एनएच 709) के चौड़ीकरण प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने के लिए वन विभाग के 5500 पेड़ों को काटा जाना है।

पेड़ काटने की एवज में दोबारा इतने ही पौधे रोपित करने के लिए करनाल में वन विभाग के पास जमीन नहीं है। वन विभाग के पास करनाल जिले में 7,632 हेक्टेयर जमीन पर वन क्षेत्र, लेकिन यहां पर अब और पौधे रोपित करने की गुंजाइश नहीं है। लिहाजा साढ़े पांच हजार पेड़ों की हरियाली करनाल से हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए पेड़ काटे जाने जरूरी है। जबकि वन विभाग पेड़ काटने की अनुमति देता है तो इतनी संख्या में दूसरे जिले के वन क्षेत्र में ही विभाग पौधे रोपित कर सकेगा। हाईवे के चौड़ीकरण से बढ़ेगा प्रदूषण

करनाल से उत्तर प्रदेश के लिए इस हाइवे पर पांच हजार वाहनों की रोजाना आवाजाही हो रही है। उत्तर प्रदेश जाने के लिए राजस्थान, पंजाब के वाहन करनाल से होकर निकलते हैं। भारी वाहनों की आवाजाही के कारण प्रदूषण को झेलने के लिए अभी जो हरियाली वातावरण को संभाल रही है। पेड़ कटने के बाद प्रदूषण बढ़ेगा। क्योंकि स्वस्थ पेड़ एक साल में 21.7 किलोग्राम कॉर्बनडाइ-ऑक्साइड अपने अंदर सोखता है और दिन में इतनी ऑक्सीजन देता है कि चार आदमी ¨जदा रह सकते हैं। स्वस्थ पेड़ के बदले में 10 पौधे रोपने होंगे

जिला अधिकारी के अनुसार एक पेड़ काटने के बदले में दस पौधे रोपने होते हैं। जलवायु के अनुसार पौधा ग्रोथ करता है और एक पौधे को पेड़ बनने में कम से कम एक साल से दो साल लग जाते हैं। इस दौरान अगर साढ़े पांच हजार पेड़-पौधे काटे जाते हैं तो वातावरण की स्वच्छता पर सीधा असर पड़ेगा। इतने पौधे रोपित करने को वन विभाग को 72 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है, लेकिन इतनी जमीन विभाग के पास नहीं है। समाज को होना होगा जागरूक

पर्यावरण संरक्षण समिति के अध्यक्ष एसडी अरोड़ा ने कहा कि सरकार की घोषणाओं के साथ जमीन भी मुहैया करवानी चाहिए। जिस हिसाब से सड़कों के विस्तारीकरण के लिए पेड़ काटे जा रहे हैं। बदले में विभाग की ओर से लगाए नहीं जा रहे हैं। पेड़ों की सुरक्षा के लिए जनता को जागरूक होना होगा। दो चरणों में होगा काम

एनएच-709 मार्ग को 85.59 करोड़ रुपये की लागत से चार व छह लेन मार्गीय बनाए जाने की योजना है। नेशनल हाईवे डिवीजन की ओर से डीपीआर भी बनाई जा चुकी है। वर्ष 2018 के अंत में इस मार्ग पर निर्माण कार्य शुरू किए जाने की योजना था। इस सड़क को लोगों की सुविधा के लिए जीटी रोड से शुगर मिल तक 6 लेन और शुगर मिल से आगे इस लाइन को 4 लेन बनाने की योजना है, जोकि दो चरणों में किया जाएगा। सड़क निर्माण को लेकर करनाल से शामली तक के लोग अपने स्तर पर प्रयास कर चुके हैं। हादसे और जाम है आम

रोड पर वाहनों की संख्या बढ़ जाने के कारण रोजाना हादसे भी हो रहे हैं। पिछले दिनों सात लोगों को सड़क हादसे में मौत हो चुकी है। सड़क पर रे¨लग आदि की सुविधा भी ठीक नहीं है। बढ़ते वाहनों का दबाव सहन करने के लिए रोड छोटा पड़ रहा है। पंजाब के होशियारपुर के ट्रक चालक सुरजीत ¨सह, शामली के दरपेश कुमार ने बताया कि जब भी इस मार्ग पर जाना होता है तो पांच से छह घंटे अधिक समय लगता है। जाम तो यहां पर आम बात है। इसके अलावा, शुगर मिल में किसान ट्रॉलियों में गन्ना लेकर जाते हैं, तब किसानों को भी परेशानी होती है। शहर का कचरा प्लांट भी इसी रोड पर जिसके चलते निगम के वाहनों का भी पूरा दिन आना-जाना होता है। सड़क निर्माण को लेकर टेंडर कॉल किया गया है। 14.5 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण के लिए 85.59 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। प्रोजेक्ट को गंभीरता से लिया जा रहा है। टेंडर सिरे चढ़ते ही काम शुरू करवा दिया जाएगा।

सजीत कुमार, एसई नेशनल हाईवे डिवीजन प्रोजेक्ट के तहत वन विभाग भूमि और हरियाली की पूर्ति के लिए 72 हेक्टेयर जमीन की जरूरत पड़ रही है, जोकि करनाल डिवीजन के पास नहीं है। इस संबंध में वन संरक्षक के माध्यम से प्रधान मुख्य वन संरक्षक को पत्र लिखा गया है। पेड़ों की कटाई के बदले में पौधरोपण भी जरूरी विषय है, जिसे गंभीरता से लिया जा रहा है।

-विजेंद्र ¨सह, जिला वन अधिकारी

Posted By: Jagran

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