जागरण संवाददाता, करनाल : आवारा कुत्तों के आतंक से शहर के लोग दहशत में हैं तो बंदरों की धमाचौकड़ी ने भी लोगों की परेशानियां बढ़ाई हुई है। शहर में यह समस्या लगातार बढ़ रही है और चिता की बात यह है कि समस्या अब लाइलाज होती जा रही है। डॉग शेल्टर बनाने की योजना ठंडे बस्ते में तकनीकी कारणों से जा चुकी है तो बंदर पकड़ने वाला ठेकेदार कई महीने से काम पर नहीं है। लिहाजा लोगों की परेशानी बढ़ रही है। आलम यह है कि प्रतिदिन करीब 10 लोग डॉग बाइट का शिकार होते हैं। पुराने शहर की छतों पर काबिज रहते बंदर

पुराने शहर और लाइनपार एरिया के घरों की छतों पर हर समय बंदरों का खौफ रहता है। गलियों में कुत्तों का आंतक और छतों पर बंदरों के खौफ के बीच लोग रह रहे हैं। घर के बाहर और छत पर लोग बच्चों को खेलने के लिए नहीं भेजते। बड़े अपनी देखरेख में ही गली में बच्चों को साथ रखते हैं। सबसे ज्यादा बच्चों को काटते कुत्ते

आवारा कुत्ते सबसे ज्यादा बच्चों को शिकार बनाते हैं। स्कूल से आते-जाते बच्चों को पीछे कुत्ते दौड़ते हैं तो साथ ही गली में खेल रहे बच्चों को भी काटने के लिए दौड़ाते हैं। कई बाइक सवारों को कुत्तों के दांत लग चुके हैं। कई बार कुत्ते अचानक पीछे दौड़ते हैं, जिससे संतुलन खोने पर बाइक सवार चोटिल भी हो जाते हैं। दुपहिया वाहन चालक रोज होते हैं चोटिल-रोहित

सेक्टर 13 न्यू हाउसिग बोर्ड निवासी रोहित कुमार ने कहा कि उनके क्षेत्र की हर गली में करीब 10 कुत्ते हर समय मौजूद रहते हैं। रात के समय ये कुत्ते काटने के लिए दौड़ते हैं। रात को रोज औसतन एक दुपहिया वाहन चालक इन कुत्तों की वजह से चोटिल होता है। इस समस्या का समाधान नगर निगम को जल्द से जल्द करना चाहिए। हर क्षेत्र में कुत्तों की समस्या-गौरव

एडवोकेट गौरव मंढाण ने कहा कि शहर में रात के समय किसी भी राह से गुजरने पर दुपहिया वाहन चालकों को कुत्तों का सामना करना पड़ता है। तेजी से दुपहिया वाहन के पीछे दौड़ते कुत्ते दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। शहर में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जहां कुत्तों की समस्या नहीं हो। निगम को होना होगा गंभीर-युद्धवीर

पार्षद युद्धवीर सैनी ने कहा कि निगम हाउस की बैठक में वह यह मामला उठा चुके हैं। लेकिन अब तक इस समस्या का समाधान करने में नगर निगम सफल नहीं हुआ है। नगर निगम को कुत्तों व बंदरों की समस्या को लेकर गंभीर होना होगा। उप नगर निगम आयुक्त धीरज कुमार ने कहा कि बंदरों को पकड़ने के लिए निगम की ओर से ठेका दिया गया था। लेकिन काफी समय से ठेकेदार काम पर नहीं आ रहा है। यदि दोबारा से बंदर पकड़ने का काम जल्द शुरू नहीं होता है तो ठेका रद्द करके नए सिरे से टेंडर किए जाएंगे। कुत्तों की नसबंदी के लिए विचार किया जा रहा है।

Posted By: Jagran

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