संवाद सहयोगी, घरौंडा : गांव कैमला के लोग विकास की घोषणाओं का धरातल पर उतरने का इंतजार कर रहे हैं। सरकार की योजनाएं गांव के प्रवेश द्वार पर अंदर जाने का इंतजार कर रही है। यही कारण है कि पिछले पांच साल से यहां का तालाब गंदगी से अटा पड़ा है और स्ट्रीट लाइट बंद पड़ीं हैं। ग्रामीणों के अनुसार विधायक अपने पिछले प्लान में कई बार कैमला का दौरा कर तालाब के सुधार के लिए आश्वासन कर चुके हैं, लेकिन मौके पर अधिकारियों को दिए गए दिशा-निर्देश गांव के प्रवेश द्वार पर ही भूला दिए गए हैं। तालाबों के गंदे पानी को शुद्ध करके सिचाई के कार्यों में प्रयोग लाने की सपना अभी नींद से जागा नहीं है।

फाइलों में बंद तालाब सुधारने की घोषणा

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राकेश कुमार ने बताया कि तालाब के सुधार के लिए विधायक हरविद्र कल्याण गांव में एक-दो बार आए हैं और अधिकारियों को निर्देश भी दिए, लेकिन योजना अभी तक सिरे नहीं चढ़ सकी है। तालाब के पानी को साफ कर सिचाई के लिए प्रयोग करने की घोषणा कार्यालयों में बंद करके रख दी गई हैं। मौजूदा हालात में गांव में तालाब की गंदगी से मक्खियों-मच्छरों की तादाद बढ़ रही है। पशु अगर तालाब में जाते हैं तो बीमार हो जाते हैं।

आधे से ज्यादा स्ट्रीट लाइट बंद

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सिमंत ने बताया कि गांव में रोशन के लिए लगाई गई स्ट्रीट लाइट आधे से ज्यादा बंद पड़ी हैं और कुछ तो गायब हो गई हैं। इस संबंध में गांव के मौजिज लोगों ने कई बार अधिकारियों को जानकारी दी लेकिन आज भी स्ट्रीट लाइट ठीक नहीं हो पाई। खंभों की नंगी तार हादसों को निमंत्रण दे रही हैं। विकास की घोषणाएं शायद गांव के प्रवेश द्वार पर अंदर आने का इंतजार कर रही हैं।

नहीं सुधरी निकासी व्यवस्था

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अजय कुमार ने बताया कि बरसात के दिनों को याद करें तो निकासी व्यवस्था चौपट है। कहने को निकासी के लिए पैसा बेशक यहां खर्च किया होगा लेकिन तालाब में गंदगी से ही गांव की निकासी का अंदाजा लगाया जा सकता है। गलियों में साफ-सफाई के लिए उचित प्रबंध नहीं किए गए। शहरों जैसे गांव का सपना दिखाने वाले अभी तक मूलभूत सुविधाएं तक मुहैया नहीं करवा पा रहे हैं।

गड्ढों से हादसों का खतरा

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हीरालाल ने बताया कि घरौंडा क्षेत्र में गांव कैमला की अपनी पहचान है। जब भी योजनाओं की घोषणा हुई तो गांव को शामिल किया गया है, लेकिन अभी तक लोगों को सुविधाओं का लाभ नहीं मिला है। लटकती बिजली की तार, मुख्य सड़क किनारे व तालाब में गंदगी इस बात का प्रमाण हैं कि गांव को लेकर प्रशासनिक अधिकारी गंभीर नहीं हैं। सड़कों पर गंदगी व गड्ढे होने पर हादसे के डर से रात के समय बच्चे व बुजुर्ग घर से बाहर नहीं जाते हैं।

Posted By: Jagran

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