जागरण संवाददाता, करनाल : प्राणवायु देवता का रिश्ता केवल एक पीढ़ी या एक परिवार के साथ न होकर पूरे समाज से जुड़ा है। वर्षो पुराने वृक्षों के साथ कई कहानियां जुड़ी हैं। समय न होने का बहाना बनाने वाली आज की पीढ़ी हैरान होगी कि उनके दादा-परदादा इन्हीं पेड़ों की छांव के नीचे खेलकर बड़े हुए हैं। बुजुर्गो के लिए ये पेड़ देवता हैं। वे पुराने पेड़ देखते हैं तो बीते पल याद किए बिना नहीं रहते। जिक्र गांव नरुखेड़ी गांव में लगे वर्षो पुराने बरगद के पेड़ का है। उम्र तय कर पाना मुश्किल है लेकिन पेड़ से जुड़े 90 वर्ष पुराने किस्से आज भी सुनने को मिलते हैं। राहगीर सुस्ताते, बारात करती विश्राम

70 वर्षीय कंवरभान नरवाल बताते हैं कि वक्त बदल गया है और इंसानी रिश्ते कमजोर हुए हैं। लेकिन वर्षो से पिता की तरह यह पेड़ आज भी बिना भेदभाव आक्सीजन दे रहा है। जब लोग पैदल सफर करते थे और साइकिल भी किसी-किसी के पास होती तो पैदल राहगीर यहीं सुस्ताते। पूरी फुर्सत से बदलते माहौल पर चर्चा होती। कोई बारात पास से निकलती तो यहां विश्राम जरूर करती। अब गांव में जब भी खुशी होती है तो सब यहीं एकत्र होकर साझा करते हैं। जागरूकता की जरूरत

कंवरभान ने बताया कि दादा-पोता सहित तीन पीढि़यां इस वृक्ष के नीचे खेलकर बड़ी हुई हैं। ऐसे पेड़ों का प्रदेश सरकार की ओर से सम्मान सराहनीय है। गांवों और सरकारी विभागीय परिसरों में ऐसे कई पेड़ प्राणवायु बांट रहे हैं। वर्षो पुराने इन पेड़ों की जानकारी जुटाने के लिए जागरूकता अभियान की जरूरत है। कई पेड़ों की जानकारी वन विभाग तक नहीं पहुंच रही। अभियान से ऐसे पेड़ों का सही आंकड़ा सामने आ सकेगा।

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